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महाशिवरात्रि पर शिवजी जल्दी ही हो जाते है खुश, इस विधि से करे पूजा

धर्म,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक कुमार योगी। शिव भक्तों के लिए शिवरात्रि तो हर महीने में आती है लेकिन महाशिवरात्रि त्योहार साल में केवल एक ही बार आती है। महाशिवरात्रि का त्योहार का फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। अब की बार यह पर्व सोमवार 4 मार्च दिन को मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि त्योहार शिव और शक्ति की मिलन की रात है। आध्यात्मिक के अनुसार इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में बताया जाता है। भोलेनाथ भक्त इस दिन व्रत रखकर अपने आराध्य का आशीर्वाद लेते है। क्या पता है महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, इसके पीछे क्या कहानी है।

महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए यह त्योहार बेहद ही महत्वपूर्ण होता है। इस पर्व पर शिवभक्त शंकर भगवान के लिए उपवास रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। शिवभक्त महाशिवरात्रि पर दिनभर शिवजी की पूजा करते है। वहीं प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद रात और दिन के बीच का समय पूजा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से बहुत जल्दी ही खुश हो जाते हैं। उधर,  महिलाओं के लिए महाशिवरात्रि का व्रत बेहद ही फलदायी होता है। शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि महाशिवरात्रि का व्रत रखने से अविवाहित महिलाओं का विवाह जल्दी हो जाता है।, वहीं, विवाहित महिलाएं अपने सुखी जीवन के लिए महाशिवरात्रि का व्रत रखती हैं। वहीं इसके बाद रातभर जागरण कर के रात के चारों प्रहर में पूजा करने से शिवजी बहुत जल्दी खुश हो जाते हैं। जगहों पर प्रकट हुए थे शिवलिंग

शिवभक्त लगाते हैं दीपस्तंभ

एक और कथा के अनुसार है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग विभिन्न 64 जगहों पर प्रकट हुए। जिनमें से केवल 12 जगह का नाम शिवभक्तों को पता है। उन्हें हम 12 ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। महाशिवरात्रि के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में शिवभक्त दीपस्तंभ लगाते हैं। दीपस्तंभ इसलिए लगाते हैं ताकि लोग शिवजी के अग्नि वाले अनंत लिंग का अनुभव कर सकें। यह जो मूर्ति है उसका नाम लिंगोभव, यानी जो लिंग से प्रकट हुए थे। ऐसा लिंग जिसकी न तो आदि था और न ही अंत।

इस प्रकार महाशिवरात्रि की पूजा करें

उपवास करने वाले दिनभर शिव मंत्र व ऊं नम: शिवाय का जाप करें तथा पूरा दिन निराहार रहें। रोगी, अशक्त और वृद्ध दिन में फलाहार लेकर रात्रि पूजा कर सकते हैं। शिवपुराण में रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा का विधान है। व्रत रखने वाले को फल, फूल, चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, धूप व दीप से रात के चारों प्रहर में शिवजी की पूजा करनी चाहिए साथ ही भोग भी लगाना चाहिए। दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको एक साथ मिलाकर पंचामृत से शिवलिंग को स्नान कराकर जल से अभिषेक करें। चारों प्रहर की पूजा में शिवपंचाक्षर मंत्र यानी ऊं नम: शिवाय का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से फूल अर्पित कर भगवान शिव की आरती और परिक्रमा करें। शाम को स्नान करके किसी शिव मंदिर में जाकर अथवा घर पर ही पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करके त्रिपुंड एवं रुद्राक्ष धारण करके पूजा का संकल्प इस प्रकार करें।

ममाखिलपापक्षयपूर्वकसलाभीष्टसिद्धये शिवप्रीत्यर्थं च शिवपूजनमहं करिष्ये

इस मंत्र का कर जाप

नियमो यो महादेव कृतश्चैव त्वदाज्ञया।

विसृत्यते मया स्वामिन् व्रतं जातमनुत्तमम्।।

व्रतेनानेन देवेश यथाशक्तिकृतेन च।

संतुष्टो भव शर्वाद्य कृपां कुरु ममोपरि।।

शिवरात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त

पहले प्रहर की पूजा – शाम 06:22 से रात 09:28 तक

दूसरे प्रहर की पूजा – रात 09:28 से 12:35 तक

तीसरे प्रहर की पूजा – रात 12:35 से 03:41तक

चौथे प्रहर की पूजा – रात 03:41 से अगले दिन सुबह 06:48 तक

पूजा के शुभ मुहूर्त

सुबह 07:15 से 08:14 तक

सुबह 09:43 से 11:10 तक

दोपहर 02:02 से 03:30 तक

दोपहर 03:30 से शाम 04:39 तक

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