मां दुर्गा के जप-तप-पूजा-पाठ श्राद्ध-तर्पण से होगी मनोकामना पूरी

मां दुर्गा के जप-तप-पूजा-पाठ श्राद्ध-तर्पण से होगी मनोकामना पूरी

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ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। देशभर में नवरात्रि पर्व पर मां दुर्गा की पूजा धूम-धाम से की जाती है। आदि शक्ति की आराधना का पावनपर्व चैत्र नवरात्र शनिवार से शुरू हो रहा है। जो 14 अप्रैल को समाप्त होगा। इस नवसंवत्सर के आरम्भ से सभी तरह के मांगलिक कार्यों जप-तप-पूजा-पाठ श्राद्ध-तर्पण आदि सभी कार्यों से संकल्प के समय वर्तमान रूद्र विंशति के ‘परिधावी’ नामक संवत्सर का प्रयोग किया जाएगा।

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रुपों की होती है पूजा

शक्ति के नौ रूपों की आराधना नौ अलग-अलग दिनों में करने के क्रम को ही नवरात्र कहते हैं। नवरात्र का अर्थ है, नया और रात्र का अर्थ है अनुष्ठान, अर्थात् नया अनुष्ठान। मां जीवात्मा, परमात्मा, भूताकाश, चित्ताकाश और चिदाकाश में सर्वव्यापी है। ये ही मां ब्रह्मशक्ति हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि के शुभारंभ पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक है। देवी के सभी साधकों को इसी इसी अवधि के दौरान कलश स्थापना करने का प्रयास करना चाहिए।

इस प्रकार करें देवी की पूजा

नवरात्र के दिन देवी के साधक मां जगदंबे की की पूजा के लिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर कलश, नारियल-चुन्नी, श्रृंगार का सामान, अक्षत, हल्दी, फल-फूल पुष्प आदि यथा संभव सामग्री साथ रख लें। माता की पूजा का कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे अथवा स्टील का कलश पूजा मे प्रयोग नहीं करना चाहिए। कलश के ऊपर रोली से ‘ॐ’ और स्वास्तिक आदि लिखें। पूजा आरम्भ के समय ‘ॐ पुण्डरीकाक्षाय’ नमः’ कहते हुए अपने ऊपर जल छिडकें। अपने पूजा स्थल से दक्षिण और पूर्व के कोने में घी का दीपक जलाते हुए इस मंत्र का जाप करें-

ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः।

दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते।।

दीपक जलाने के बाद मां दुर्गा की मूर्ति के बाईं तरफ श्री गणेश की मूर्ति रखें। इसे पश्चात् पूजा स्थल के उत्तर-पूर्व भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज नदी की रेत और जौ ‘ॐ भूम्यै नमः’ कहते हुए डालें।

इसके उपरांत कलश में जल-गंगाजल, लौंग, इलायची,पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें। अब कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए ‘ॐ वरुणाय नमः’ मंत्र पढ़ें और कलश को पूर्ण रूप से भर दें। इसके बाद आम की टहनी (पल्लव) डालें। यदि आम की पल्लव न हो तो पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर का पल्लव भी कलश के ऊपर रखने का विधान है। जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें। उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखकर कलश को माथे के समीप लाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए रेत पर कलश स्थापित करें।

श्रद्धा-विश्वास और समर्पण से करें पूजा

पूजा से पहले एक एक बात का ध्यान जरुरी है कि आराधना के लिए श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का होना बहुत जरुरी है। अगर इन दोनों के साथ समर्पण भी है, तो आप की सभी बिघ्न-बाधाएं दूर होंगी। पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि मां मैं आज नवरात्र की प्रतिपदा से आप की आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा-रही हूं, मेरी पूजा स्वीकार करके ईष्ट कार्य को सिद्ध करो। पूजा के समय यदि आप को कोई भी मन्त्र नहीं आता हो तो केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे।’ से सभी पूजन सामग्री चढाएं। माँ शक्ति का यह अमोघ मंत्र है। आप के पास जो भी यथा संभव सामग्री हो उसी से सच्चे मन से आराधना करें। कोशिश करें कि माता को श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरुर चढ़ाएं। सर्वप्रथम मां का ध्यान, आवाहन, आसन, अर्घ्य, स्नान, उपवस्त्र, वस्त्र, श्रृंगार का सामन, सिन्दूर, हल्दी, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, मिष्ठान, ऋतुफल, नारियल आदि जो भी सुलभ हो, उसे अर्पित करें। और अंत में मां दुर्गा की आरती करें। पूजन के पश्चात् आरती और क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। भक्ति में शक्ति हो तो शक्ति हमेशा प्रसन्न रहती हैं।

इन मंत्रों के जाप से पूरी होगी मनोकामना

– जिन आराधकों के घर में अशांति हो उन्हें – ‘या देवि, सर्व भूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।’ यह मंत्र जपने से सुख-शान्ति मिलेगी।

– जो लोग कर्ज में डूबे हुए हैं वे ‘या देवि, सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।’ मंत्र से मां की पूजा करें। इन सबके अतिरिक्त अगर संभव हो तो कुंजिका स्तोत्र और देव्य अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

– अविवाहित पुरुष विवाह हेतु ‘पत्नी मनोरमां देहि, मनो वृत्तानु सारिणीम, तारिणीम दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम।’ का जप और पूजन करके मनोनुकूल जीवन साथी पा सकते हैं।

– पूजन के पश्चात् आरती और क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। भक्ति में शक्ति हो तो शक्ति हमेशा प्रसन्न रहती हैं।

– विद्यार्थी वर्ग ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः’ मंत्र पढ़ते हुए माता शक्ति कि पूजा करें।

– कुंवारी कन्याओं के लिए ‘ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्य धीश्वरी, नन्द गोप सुतं देवी पतिं मे कुरु ते नमः।’ मंत्र से प्रसन्न होकर माता शीघ्र विवाह का आशीर्वाद प्रदान करेंगी।

– अधिक धन प्राप्ति के लिए प्रतिदिन दशांग, गूगल और शहद मिश्रित हवन सामग्री से हवन करें।

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