मिसाल रैंकिंग : 14 माह में एक बार​ भी टॉप 10 में नहीं पहुंचा जयपुर, चिकित्सा सुविधा, मॉनिटरिंग में विफल

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ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रियंका शर्मा। एक तरफ जयपुर वर्ल्ड हेरिटेज, स्मार्ट सिटी में शामिल हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ चिकित्सा विभाग की और से जारी ‘मिसाल रैकिंग’ में 14 माह में एक बार भी टॉप-10 में शामिल नहीं होने पर मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर सवालिया निशान लग गया है। हैल्थ इंडेक्स में लगातार पिछडऩे पर विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। जी हाँ पिछड़ने के प्रमुख कारणों में अस्पतालों में दवा की उपलब्धता, जांच सुविधा, आउटडोर के समय डॉक्टरों की उपस्थिति एवं मरीजों का क्वालिटी व सही समय पर इलाज देने में संतुष्ट नहीं होना पिछडऩे के प्रमुख कारण हैं।

दरअसल, ओजस सॉफ्टवेयर के जरिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े जनाना अस्पताल चांदपोल, महिला चिकित्सालय सांगानेरी गेट एवं गणगौरी अस्पताल में गर्भवती, उनके जीवित जन्म लेने वाले बच्चों की संख्याओं की समय पर सूची नहीं बनाना आदि शामिल है। सीएमएचओ जयपुर प्रथम डॉ.नरोत्तम शर्मा व सेकंड डॉ.प्रवीण असवाल का कहना है कि समय पर गर्भवती, टीकाकरण, राजश्री योजना की लाइन लिस्टिंग करने के लिए अस्पतालों को बार-बार पत्र लिखा जा चुका है। क्योकि, उनकी गलती के कारण लगातार हम पिछड़ रहे हैं। निदेशक (जन स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. माथुर का कहना है कि मिसाल रैंकिंग में लगातार पिछडऩे के कारणों की रिपोर्ट मांगी गई है।

एसएमएस अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ.वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रतिस्पर्धा से सिस्टम में सुधार आता है। मरीजों से उपलब्ध सुविधाओं का रोजाना फीड बैक लेना चाहिए। रैकिंग में टॉप-10 में शामिल होने के लिए पैरामीटर का अध्ययन कर उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए। जिससे मरीजों को अस्पताल में हो रही परेशानियों का सामना कम से कम करना होगा, साथ ही मिसाल रैकिंग में भी अपनी भूमिका का बना सकेगा।

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