मुलायम ने कहा – गई भैंस पानी में, सपा-बसपा में कौन कहां लड़ेगा तय

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, तीर्थराज । उत्तरप्रदेश में सियासी उबाल इन दिनों चरम पर है। एक तरफ प्रियंका गांधी वाड्रा ने राजनीति में कदम रख पूर्वी यूपी की कमान संभाली है तो वहीं लंबे समय से धुर विरोधी रही सपा-बसपा ने गठबंधन कर यूपी की राजनीति को नई हवा दे दी है। हाल ही में सपा-बसपा ने 38-38 सीटों पर यूपी में लोकसभा चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था लेकिन अब आज इस गठबधंन में कौन कहां से चुनाव मैदान में उतरने वाला है, ये घोषणा की गई है। जिस पर समाजवादी पार्टी ने अपने खाते से एक सीट आरएलडी को दी जिसके बाद अब यूपी की कुल 80 संससीय सीटों में से बसपा 38 पर, सपा 37 पर और 3 सीटों पर आरएलडी अपने उम्मीदवार उतारेंगे।

गठबंधन ने 2 सीटों रायबरेली और अमेठी पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला लिया है। इस पर समाजवादी पार्टी के संयोजक मुलायम सिंह यादव ने प्रतिक्रिया दी है कि इस तरह तो पार्टी खत्म हो जाएंगी, जिसके बाद से गठबंधन का बंटवारा सुर्खियों में है।


खत्म हो जाएगी पार्टी, आधी सीटों पर क्यों मानें अखिलेश – मुलायम
समाजवादी पार्टी के संरक्षक ने सपा-बसपा गठबंधन पर पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए जोरदार हमला बोला है और इस बात पर आपत्ति जताई है कि अखिलेश यूपी में आधी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गये। राजनीतिक गलियारों में मुलायम का यह बयान अखिलेश के लिए काफी अहम माना जा रहा है। मुलायम ने कहा कि आखिर कैसे अखिलेश यादव बहुजन समाज पार्टी के साथ ऐसे गठबंधन के लिए राजी हो गए जिसमें समाजवादी पार्टी के हिस्से में आधी सीटें आई हैं। मुलायम ने तो ये तक कहा कि पार्टी के लोग ही पार्टी को खत्म करने में जुटे हैं। वहीं महिलाओं को पार्टी में तरजीह नहीं देने को लेकर भी उन्होंने अखिलेश पर हमला बोला है।
साथ ही उन्होंने कहा कि हमने इतनी बड़ी पार्टी बनाई लेकिन अब पार्टी को कमजोर किया जा रहा है। इस तरह तो मात्र 25-26 सीटें ही जीत सकते हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले मुलायम सिंह ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत और सत्ता में वापसी की कामना की थी। मुलायम सिंह यादव ने कहा, ‘मैंने अखिलेश से कहा है कि लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम का एलान कर दो जिससे को तैयारी कर सकें। बीजेपी तैयारियों के मामले में हमसे आगे निकल गई है। हमने 14 महीने पहले उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिया था और बड़ी जीत मिली थी। लेकिन अखिलेश अभी तक टिकट ही नहीं तय कर पाए.’ उन्होंने कहा कि कि जीतने वाले नेताओं को टिकट दो। शिवपाल को भी लोग नाम दे रहे हैं। टिकट देने भले ही अखिलेश के हाथ में तो हटाना मेरे हाथ में है। यूपी की राजनीति के इन दो धुर विरोधियों का एक साथ आना प्रदेश की राजनीति के पुरोधा मुलायम को रास नहीं आता दिख रहा है।
सपा ने अपनी एक सीट कम कर दी आरएलडी को
उत्तरप्रदेश की राजनीति में सपा-बसपा गठबंधन किस हद तक मोदी लहर को रोकने में कामयाब हो पाता है ये तो जनता ही तय करने वाली है लेकिन गठबंधन की दोनों पार्टियों ने कौन कहां से चुनावी मैदान में उतरने वाला है ये फैसला कर लिया है। सपा-बसपा के बीच संसदीय सीटों के बंटवारे के लिए सहमति बन गई है। सूबे में बसपा को सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला है जिसके बाद बसपा गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। जिसमें बसपा 38 सीटों पर अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने वाली है तो वहीं 37 सीटों पर सपा अपने उम्मीदवारों के लिए दांव लगाएगी। साथ ही दोनों पार्टियां प्रदेश में किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है इसकी भी औपचारिक घोषणा कर दी गई है। सपा-बसपा गठबंधन में पहले दोनों पार्टियों के 38-38 सीटों पर लड़ने की सहमति बनी थी लेकिन अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने हिस्से की एक सीट आरएलडी को दी है। जिसके बाद अब यूपी में 3 सीटों पर आरएलडी भी अपने उम्मीदवार चुनावी दंगल में उतारने वाली है। जिसमें दोनों पार्टियों ने बागपत, मथुरा और मुजफ्फरनगर सीटों को छोड़ा हैं। ये तीनों सीटें आरएलडी के खाते में गई हैं।
पश्चिमी यूपी की ज्यादातर सीटों पर बसपा प्रत्याशी
सपा-बसपा गठबंधन ने यूपी में अपनी-अपनी सीटों की घोषणा कर दी है। यूपी में मायावती की बहुजन समाज पार्टी पश्चिम यूपी की ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। वहीं यहां की रूहेलखंड और मैनपुरी कन्नौज के आस-पास की सीटें अखिलेश की सपा के पास है। जिसमें दोनों पार्टियों को हर मंडल की सीटें मिली हैं। प्रदेश की कुल 80 लोकसभा सीटों में अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित 17 सीटों में से 7 पर सपा चुनाव लड़ने वाली है तो वहीं 10 पर बसपा अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। बता दें कि सपा और बसपा ने सूबे के 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। लेकिन अखिलेश यादव ने अपने कोटे से एक सीट आरएलडी को दे दी है। इस तरह से आरएलडी को तीन सीटें मिली हैं। जबकि रायबरेली और अमेठी दो सीटों पर कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया गया है।
खैर, ये पहला मौका नहीं है जब सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने बयान देकर अखिलेश यादव को निशाना बनाया हो। इससे पहले भी 16वीं लोकसभा के आखिरी दिन मुलायम ने सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबके साथ मिलजुलकर काम किया है, सबको साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री मोदी को हमारी बधाई और हमारी कामना है कि वह फिर से चुनकर आएं और प्रधानमंत्री बनें. मुलायम के इस बयान को बीजेपी ले उड़ी और लगातार अखिलेश पर हमला करने के लिए इसका इस्तेमाल भी कर रही है। ऐसे में मुलायम का नया बयान अखिलेश यादव की मुश्किलें और बढ़ाने वाला लगता है। खैर, ये सियासी दांव पेच न हो तो राजनीति में नयापन देखने को ही नहीं मिलता है, लेकिन मुलायम के बयानों से लगता हैं कि वे अखिलेश को अब तक नौसिखिया ही समझते हैं।

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