मोदी को हराने के लिए गिले शिकवे भुलाकर बना महागठबंधन होता दिख रहा है तार-तार

राजनीति,

ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। लोकसभा चुनाव में दो दलों ने अपने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर मोदी को हराने के लिए महागठबंधन बनाया था। लोकसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही साथ महागठबंधन भी खत्म होता दिख रहा है। यूपी में हुए महागठबंधन में अब दरार आने लगी है। अब गठबंधन के दोनों खेमें उपचुनाव में अलग-अलग चुनाव लड़ने की बात कर रहें हैं।

बसपा अध्यक्ष मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मीडिया को बताया कि उनकी पार्टी विधानसभा के उपचुनाव में अपने बलबुते पर चुनाव लड़ेगी। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि इससे सपा के साथ उनके गठबंधन पर किसी तरह का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। गठबंधन बरकार रहेगा।

मायावती द्वारा उपचुनाव में अकेले चुनाव लड़ेने की बात पर अब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि अगर उपचुनाव में गठबंधन साथ नहीं होता है तो कोई दिक्कत नहीं है समाजवादी पार्टी भी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी।

रिश्ता बरकार, लेकिन शर्ते लागु

मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा कि चुनाव चाहे भले ही अलग-अलग लड़ेंगे लेकिन अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव से उनके रिश्ते कभी खत्म नहीं होने वाले हैं। मायावती ने कहा कि अगर सपा प्रमुख अपने राजनीतिक कार्यों के साथ अपने लोगों को मिशनरी बनाने में सफल रहे तो साथ चलने की सोचेंगे। फिलहाल हमने उपचुनावों में अकेले लड़ने का फैसला किया है।

बता दें की लोकसभा चुनाव में यूपी के कुल 11 विधायकों ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। इनमें से नौ विधायक भाजपा के और सपा, बसपा के एक एक विधायक शामिल हैं। खाली हुई इन 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव संभावित है। लोकसभा चुनाव के परिणाम की समीक्षा के आधार पर बसपा प्रमुख ने चुनाव में हार के लिए सपा को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि लोकसभा चुनाव में यादव मतदाताओं ने उत्तर प्रदेश में सपा बसपा का साथ नहीं दिया। हालांकि उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से कोई मनमुटाव नहीं होने की भी बात भी कही है।

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