मोदी में राम की छवि दिखाने में सफल नहीं हो पाई बीजेपी

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ले पंगा न्यूज डेस्क, धीरज सैन। भगवान राम का जन्म धरती पर से पाप का नाश करने के लिए हुआ था। मर्यादा पुरूषोत्तम ने धरती पर आकर साधु संतों का ही तारणहार नहीं किया था बल्कि उन्होंने अपनी करूणानिधी से रावण सहित कई दुष्ट राक्षसों का भी जीवन उद्धार किया था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र थे। संसार में भगवान उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है। उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता, यहाँ तक कि अपनी पत्नी को भी त्याग दिया था।

राजा राम एक न्यायप्रिय राजा थे। उनका राज्य न्यायप्रिय और खुशहाल माना जाता था। राजा राम ने हमेशा ही मर्यादा को सर्वोपरि माना है। इसी कारण उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम राम कहा जाता था। उनकी छवि हमेशा आत्मीयता की रही है। इसलिए भारत में जब भी अच्छे राज्य की बात होती है तो आज भी रामराज या राम राज्य का उदाहरण ​दिया जाता है। राजा राम की छवि को कई कवियों ने अपनी लेखनी से उकेरा है। लेकिन कविराज तुलसीदास ने भगवान राम की जीवन पर कई अच्छी रचनाएं की है। उन में से सबसे अहम और प्रमुख रामचरितमानस है। जिसमें कविराज ने अपने शब्दों में भगवान राम का चित्रण अपनी लेखनी से उतारा है। इसलिए आज उन्हें तुलसी के राम सीताराम की उपमा दी गई है।

बहरहाल, अब भगवान राम की ये छवि भारतीय जनता पार्टी मोदी में देखती है। जिनके हाथ मे धनुष है। भाजपा ने आज इस कद्र मोदी की छवि जनमानस में बैठाने की है, जिस प्रकार राजा राम की थी। लेकिन वो मानो अहंकारी हो। लेकिन राम की छवि इसके बिल्कुल विपरीत थी। वो हमेशा अहंकार, कपट, मोह, माया और छल से दूर रहे है।

राम बनने की मोदी की ये छवि आज समाज को कई टुकड़ों में बांट रही है। लोकसभा चुनाव के आते ही पांच साल के बाद एक बार फिर पीएम मोदी को राम की याद आ गई है। आम चुनाव की सरगर्मियों के बीच हाल ही में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और पीएम मोदी के बीच खूब सियासी हमले देखने को मिल रहे है। हाल ही में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर हल्ला बोला कहा कि बीजेपी बाबू, आप कहते हैं कि जय श्री राम, मगर क्या आपने अब तक एक भी राम मंदिर बनाया? साथ ही सीएम बनर्जी ने कहा कि चुनाव के आते ही रामचंद्र आपकी पार्टी के एजेंट बन जाते हैं। आप जय श्रीराम का नारा लगाते हो और दूसरों को भी जबरदस्ती बोलने को कहते हैं। आप और आपकी पार्टी राम मंदिर को लेकर कभी भी गंभीर नहीं हुए है। लेकिन जब चुनाव आते है तो आपकी पार्टी लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने के लिए राम शब्द का जाप करने लग जाते हो। इसी बीच ये कयास लग रहे हैं कि आज के सन्दर्भ में राम की यह छवि तुलसी के राम की छवि से बिल्कुल अलग है।

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