This master stroke will make Pakistan doomed, no need of war

ये मास्टर स्ट्रोक पाकिस्तान को कर देगा तबाह, नहीं युद्ध की दरकार

एयर स्ट्राइक,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, तीर्थराज । पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में किये गये आत्मघाती आतंकी हमले में देश के 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गये, जिसके चलते पूरे देश में पाकिस्तान के आतंकवादी रूख पर गुस्सा है। देश में जगह-जगह बंद का आयोजन कर मोदी सरकार से इनको मुंह तोड़ जवाब देने की कार्रवाई की मांग की जा रही है। मोदी सरकार ने इस क्रम में कड़े कदम उठाते हुए पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन कर करारा झटका दिया है। इसके बाद पाकिस्तान को अरबों का नुकसान होने वाला है। अब देश की जनता को आशा है कि भारत, पाकिस्तान के साथ की गई सिंधु जल संधि को समाप्त कर देगा। इससे पाकिस्तान की कमर टूट जाएगी और वो घुटनों पर आ जाएगा।

सिंधु जल संधि तोड़ भारत लगाये मास्टर स्ट्रोक

पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों का बदला लेने के क्रम में मोदी सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। एक तरफ वैश्विक स्तर कमजोर करने की कड़ी में सरकार ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा छीन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब करने की पहल की है। विश्व के अधिकतर देशों के मिल रहे समर्थन के बाद भारत पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने के मूड में है। इस हमले के बाद पूरा देश पाकिस्तान और आतंकवाद को लेकर गुस्से से आग बबूला है और सरकार से पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात कही जा रही है। देश की जनता को यह भी उम्मीद है कि भारत पाकिस्तान के साथ हुई सिंधु जल संधि को समाप्त कर देगा। क्योंकि भारत ये निर्णय लेता है तो यह पाकिस्तान पर ‘परमाणु बम’ गिराने के समान होगा। देश के हर वर्ग, सभी पक्षों, यहां तक कि पर्यवेक्षकों का भी यही मानना है कि भारत द्वारा इस जल संधि को समाप्त कर पाकिस्तान की कमर तोड़ी जाए।

संधि खत्म करते ही पाकिस्तान में मच जाएगा हाहाकार

बता दें कि, सितंबर-साल 1960 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के सैनिक शासक फील्ड मार्शल अयूब खान के बीच यह सिंधु जल संधि हुई थी। पाकिस्तान द्वारा बार-बार आतंकवाद का सहारा लेकर भारत को नुकसान पहुंचाने के बाद कई बार यह संधि समाप्त करने की मांग उठती रही है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद अब यह दबाव और बढ़ चुका है। भारत पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा तो छीन ही चुका है, अब यदि भारत ये सिंधु जल संधि समाप्त करने का निर्णय लेता है तो भारत से बहने वाली नदियों के पानी को पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकता है, जिसके चलते पाकिस्तान में पानी के लिए हाहाकार मचना तय है। भारत सरकार की ओर से ये पाकिस्तान पर ‘परमाणु बम’ से भी बड़ा हमला होगा। भारत का यह कदम पाकिस्तान को अपनी आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति को बदलने पर मजबूर कर देगा।

‘ कड़वी सच्चाई ‘ पर सरकार लेगी कोई फैसला !

साल 1960 में भारत-पाकिस्तान के बीच पानी को लेकर सिंधु जल संधि हुई थी, जिसे लेकर जम्मू-कश्मीर के लोग कहते हैं कि भारत ने हमारे राज्य के लोगों के भविष्य को पाकिस्तान के पास गिरवी रख दिया था। बता दें कि, यह एक कड़वी सच्चाई है, इस संधि के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में बहने वाली सिंध, झेलम और चिनाब नदियों के पानी को पाकिस्तान जाने से भारत नहीं रोक सकता है। यहां तक कि इन तीनों नदियों का पानी जम्मू-कश्मीर राज्य के वासी अधिक मात्रा में इस्तेमाल तक नहीं कर सकते। इसे भारत के लिए इससे बड़ी बदनसीबी ही कहा जा सकता है कि इन नदियों पर बनने वाले बांधों के लिए भारत को पहले इस तरह से खून बरसाने वाले पाकिस्तान से अनुमति लेनी पड़ती है। देश के बड़े वर्ग यहां तक कि अधिकत्तर राजनीतिक पार्टी नेताओं का भी यही मानना है कि यह जलसंधि जम्मू कश्मीर के वाशिदों के लिए सिर्फ परेशानी ही लेकर आई है और कुछ नहीं।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व सरकारें भी उठा चुकीं हैं मांग

जब-जब पाकिस्तान ने अपनी नापाक हरकतें दिखाते हुए आतंकवाद का सहारा लेकर भारत पर जुल्म ढ़ाये हैं तब-तब सिंधु जल संधि तोड़ने की मांग उठती रही है। इसके अलावा यह मांग उठाने वालों में सबसे ऊपर हैं जम्मू-कश्मीर प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुला और उमर अब्दुला। पिछले कई वर्षों से अब्दुला सरकारें इस मांग को दोहरा रहे हैं, यहां तक कि अपने शासनाकाल में वे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जम्मू कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे के दौरान भी फारूक अब्दुल्ला इस मांग का राग अलापने से नहीं चूके थे। उनकी मांग जायज भी थी क्योंकि इस संधि के तहत पाकिस्तान तथा पाक कब्जे वाले कश्मीर की ओर बहने वाले जम्मू कश्मीर की नदियों के पानी को पीने व सिंचाई के लिए एकत्र करने का अधिकार तक जम्मू कश्मीर के पास नहीं है।

संधि तोड़ते ही निपट जाएगा पाकिस्तान, नहीं पड़ेगी युद्ध की जरूरत

बार-बार भारत द्वारा पाकिस्तान की हर गलती पर रियायत देना, पाकिस्तान के लिए बार-बार गलती करने की आदत बन गया है। भारत हर बार माफी देकर दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, पर पाकिस्तान अपना आतंकी चेहरा छिपाकर पीठ पीछे छुरा ही घोंपता रहा है। आतंकवाद को पनपा कर पाकिस्तान बार-बार भारत की धरती पर खून बरसाता रहा है। गुरूवार को पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा पुलवामा में किये गये आतंकी हमले के बाद भारत-पाक सीमा पर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। इस प्रांत में पाकिस्तान लगातार पिछले 30 सालों से आतंकवाद की आड़ लेकर अनगिनत जवानों के अलावा स्थानीय लोगों की जानें लील चुका है। इसके साथ ही सिंधु जल संधि को तोड़ने का दबाव लगातार सरकार पर बढ़ता जा रहा है। यहां तक कि भारतीय सेना भी यही कहती है कि अगर इस जलसंधि को तोड़ने का फैसला लिया जाता है तो युद्ध की आवश्यकता ही नहीं है, ये फैसला ही पाकिस्तान पर ‘परमाणु बम’ से कम नहीं होगा।

संधि तोड़ भारत बना सकता है पाकिस्तान पर प्रेशर

संधि को लेकर भारतीय सेना तो कहती है कि पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़ने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी अगर भारत जलसंधि के ‘परमाणु बम’ को पाकिस्तानी जनता के ऊपर फोड़ देता है। भारत जलसंधि को तोड़कर पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को रोकता है तो पाकिस्तान में पानी की त्राहि-त्राहि मच जाएगी और बदले में भारत जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान को अपना हाथ पीछे खींचने के लिए मजबूर कर सकता है। इस सच्चाई को लेकर पाकिस्तान को भी कहीं न कहीं डर जरूर है। यही कारण है कि वह इस जलसंधि के लिए विश्व बैंक के सामने लगातार गुहार करता आया है कि वह भारत को ऐसा कोई भी फैसला लेने से रोके। हांलाकि इंटरनेशनल प्रेशर के चलते भारत सरकार को यह फैसला लेना आसान नहीं होगा। वहीं जम्मू-कश्मीर के आम नागरिक मानते है कि पाकिस्तानी आतंकवाद से बचने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे नहीं झुककर ये फैसला दृढ़ता से लेना चाहिए। वरना, अगर भारत यूं ही पाकिस्तानी चालों के आगे झुकता रहा तो ये आतंकवाद कभी भी खत्म होने वाला नहीं है।

नई दिल्ली में होने वाली बैठकों में भी ये संधि समाप्त करने के लिये जोर-शोर से स्वर उठाये जाते रहे है। खैर, भारत सरकार इस मामले में इंटरनेशनल प्रेशर के चलते क्या फैसला लेती है, ये तो देखने वाली बात होगी, लेकिन अगर सिंधु जल संधि समाप्त कर अनेकों परमाणु बमों से अधिक शक्तिशाली भारत यह ‘परमाणु बम’ पाकिस्तान पर फोड़ता है तो उसकी अक्ल ठिकाने आना तय है।

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