ficestate

ये हैं वो पांच राज्य, जो इस बार बनाएंगे सत्ता का गणित

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क। देवेन्द्र कुमार। लोकसभा चुनाव 2019 का बिगुल बज चुका है। सभी राजनीतिक दल जीत के लिए समीकरण बनाने में लगे हुए हैं। पार्टियों ने जनसम्पर्क अभियान को बढ़ा दिया है। सभी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व ने रैलियां शुरू कर दी है। पार्टियां आम लोगों को चुनाव में अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। पार्टियां इस जुगत में लगी हुई हैं किस तरह से सत्ता की कुर्सी को अपने पाले में लाया जाए। 2014 में हुए आम चुनाव को मोदी लहर ने ऐतिहासिक बनाया था। उसके बाद इस चुनाव में भी मौजूदा सरकार सत्ता हासिल करने के लिए कोई नया जादू चलना चाह रही है तो वहीं विपक्ष भी भाजपा से सत्ता छिनने के लिए अपने को मजबूत करने में लगा हुआ है। देश में पांच बड़े राज्य ऐसे हैं जो सत्ता का गणित बनाने में अहम भूमिका रखते हैं। इन राज्यों में तीन राज्य ऐसे हैं जिनमें 2014 के चुनाव में भाजपा ने प्रचंड सीटें हासिल की थी। लेकिन दो राज्य ऐसे थे जिनमें भाजपा केवल मौजदूगी ही दर्ज कर पाई थी। भाजपा इस बार पूर्वी और दक्षिण भारत में झंड़ा गाड़ने पर अधिक ध्यान दे रही है तो वहीं विपक्ष एकजुट होकर भाजपा के झंड़े को उखाड़ फेंकने की कोशिश में है। आइए जानते हैं वो राज्य और उनके राजनीतिक गणित के बारे में…..

उत्तर प्रदेश (80 सीटें)

जब उत्तर प्रदेश की बात आती है और वो भी चुनावों के समय तो दिमाग में एक ही बात घूमने लगती है कि दिल्ली की गद्दी का रास्ता यूपी से होकर जाता है। इस कहावत को साल 2014 में हुए आम चुनावों के परिणामों ने पूरी तरह से सही साबित कर दिया। भाजपा ने इस चुनाव में अविश्वशनीय प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश की कुल 80 में से 71 सीटों को अपने हिस्से में लिया। बची नौ सीटों में से भाजपा की सहयोगी अपना दल ने भी दो सीटों पर कामयाबी हासिल की। सूबे की दो धुरंधर पार्टियां सपा और बसपा को इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका लगा। सपा जहां पांच सीटों पर सिमट गई वहीं बसपा का खाता भी नहीं खुला। कांग्रेस अपने दो सियासी गढ़ रायबरेली और अमेठी को ही बचा सकी। इसके बाद 2017 में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 2014 का चमत्कार दोहराकर सियासी खेमों में हड़कंप मचा दिया। भाजपा ने 312 सीटें जीतकर यूपी विधानसभा चुनाव में तीन-चौथाई बहुमत प्राप्त किया। वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन को 54 और बसपा को 19 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि इसके बाद हुए उपचुनाव में सपा-बसपा-रालोद साथ आए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर, उपमुख्यमंत्री केशवप्रसाद मौर्य की फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट जीतकर सभी दलों के लिए उम्मीदें जगा दीं। इस बार भाजपा और उसके सहयोगी दलों को संयुक्ती विपक्षी उम्मीउदवारों से जूझना पड़ सकता है। एसपी 37 सीट, बीएसपी 38 और आरएलडी 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दो सीटें कांग्रेस के लिए छोड़ी गई हैं। हालांकि कांग्रेस के इस गठबंधन के साथ आने को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में की गई एयर स्ट्राइक से पीएम मोदी की लोकप्रियता बढ़ी है। जिससे भाजपा को थोड़ी राहत मिली है।

पश्चिम बंगाल (42)

इस बार के आम चुनाव में पश्चिम बंगाल का चुनाव काफी दिलचस्प होने वाला है। भाजपा उम्मीद लेकर चल रही है कि वो यहां से ज्यादा से ज्यादा सीटें अपने पाले में लेकर आएगी। पार्टी को अंदेशा है कि लखनऊ और दूसरे हिंदी भाषी राज्यों से घटने वाली सीटों की भरपाई यहां से की जा सकती है। इसके दूसरी और नजर डाले तो राज्यस में सत्तारूढ़ टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ज्याबदा से ज्याऔदा सीटें जीतकर पीएम पद के लिए अपना दावा मजबूत करना चाहती हैं। बंगाल में इन दोनों पार्टिओं के बीच ही मुख्य मुकाबला होने वाला है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में टीएमसी को 34, भाजपा 2, सीपीएम 2 और कांग्रेस को 4 सीटें मिली थीं। इस बार सीपीएम और कांग्रेस के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। खास बात यह है कि ममता पश्चिम बंगाल में कोई गठबंधन नहीं करना चाहती। और भाजपा उनकी इस जिद में अपने लिए मौका ढूंढ रही है।

बिहार (40 सीटें)

बिहार में एनडीए के दलों के बीच तय हो चुका है कि कौन किस सीट से चुनाव लड़ेगा। बंटवारे में तय हुआ है कि भाजपा और जेडीयू 17-17 सीटों पर और एलजेपी 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस बंटवारे में सबसे ज्यादा फायदा एलजेपी को हुआ है। एलजेपी को राज्यसभा में भी एक सीट का भी ऑफर दिया गया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां से 22 सीटों पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार महज 17 सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। साल 2014 में भाजपा, एलजेपी और आरएलएसपी के गठबंधन को 31 सीटें मिली थीं। इसके अलावा आरजेडी को 4, कांग्रेस को दो, जेडीयू को दो और एनसीपी को एक सीट पर जीत हासिल हुई थी। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में हुए विधानसभा चुनाव हुए जिसमें जेडीयू और आरजेडी मिलकर लड़े। हालांकि यह गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चल पाया। नीतीश फिर एनडीए में लौट आए हैं। फिलहाल एनडीए सीटों का बंटवारा होने से बढ़त में दिख रहा है। वहीं विपक्षी महागठबंधन बनने से पहले ही दरकता दिख रहा है। बिहार में राज्य की 40 सीटों पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है। आरजेडी और दूसरे सहयोगियों ने 13 मार्च तक स्थिति साफ करने के लिए कांग्रेस को कहा है। 40 सीटों पर आरजेडी, कांग्रेस के अलावा मुकेश सहनी, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन मांझी, शरद यादव की पार्टी भी महागठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी थीं। लेकिन सीटों के बंटवारा फंस गया। कांग्रेस और आरजेडी में सीटों के बंटवारे को लेकर ठन गई है। कांग्रेस 12 सीटें मांग रही है जबकि आरजेडी 10 सीटें से ज्यादा देने को तैयार नहीं है।

तमिलनाडु (39 सीटें)

दक्षिण भारत की बात करें तो संसदीय सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य तमिलनाडु है इसलिए सभी इस पर नजरें बनाए हुए हैं। द्रविड राजनीति की दो बड़ी शख्सियतों जयललिता और करुणानिधि की मौत के बाद हो रहे लोकसभा चुनाव काफी दिलचस्प होने का अनुमान है। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) और भाजपा के बीच गठबंधन हो गया है। गठबंधन में यह तय हुआ कि तमिलनाडु की 39 और पुडुचेरी की एक सीट में से भाजपा 15 जबकि एआईएडीएमके 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। भाजपा अपने हिस्से की सीटों में से 8 पर चुनाव लड़ेगी। 4 सीट पीएमके, 3 सीट डीएमडीके को दी जाएगी। इसके अलावा एआईएडीएमके भी अपनी 25 सीटों पर जीके वासन की टीएमसी, एन रंगास्वामी की एनआरसी और के कृष्णास्वामी की पीटी जैसी पार्टियों को चुनाव लड़ने का मौका देगी। इसके अलावा डीएमके और कांग्रेस एक साथ लोकसभा चुनाव में उतर रहे हैं। दोनों के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति बन गई है। समझौते में तय हुआ है कि तमिलनाडु की नौ और पुडुचेरी की एक लोकसभा सीट पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में राज्य की 39 लोकसभा सीटों में से एआईएडीएमके को 37 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं विपक्षी दल डीएमके को एक भी सीट नहीं मिली थी। यही वजह है कि इस बार डीएमके लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी दल को घेरने के लिए कांग्रेस से गठबंधन करने जा रहा है।

महाराष्ट्र (48 सीटें)

2014 में हुए पिछले आमचुनाव में एनडीए ने राज्य की कुल 48 सीटों में से 41 पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा एनसीपी को 5 तथा कांग्रेस को दो ही सीटें मिल पाई। इस बार के लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच लंबा विवाद चला। लंबे विवाद के बाद भाजपा और शिवसेना के बीच सीटों का बंटवारा हो गया है। भाजपा 25 और शिवसेना 23 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। सीटों के बंटवारे से यह साफ हो गया है कि शिवसेना को सूबे में पिछले चुनावों की तुलना में अधिक सीटें मिली हैं। एनडीए में शामिल आरपीआई को एक भी सीट नहीं देने के कारण पार्टी नेता रामदास आठवले नाराज हैं। हालांकि चुनाव से ठीक पहले शिवसेना के साथ आ जाने के बाद भाजपा ने राहत की सांस ली है। उधर, कांग्रेस और एनसीपी के बीच अभी सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाई है। दोनों दलों के बीच 20-20 सीटों के लिए सहमति है लेकिन 8 सीटों पर पेंच फंसा है। इनमें पुणे और अहमदनगर सीट भी शामिल है। भाजपा-शिवसेना को घेरने के लिए कांग्रेस महाराष्ट्र में बसपा को दो तो एसपी को एक लोकसभा सीट का ऑफर दे सकती है। इससे यूपी में समीकरण सधने की उम्मीद है।

Tag In

# उपेंद्र कुशवाहा # शरद यादव #आरजेडी #केशवप्रसाद मौर्य #जीतन मांझी #टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी #नरेन्द्रमोदी #पीएम मोदी #सपा-बसपा-रालोद बीजेपी महागठबंधन योगी आदित्यनाथ लोकसभा चुनाव 2019

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *