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लोकसभा चुनाव: पूर्व राजस्थान में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को मिली बढ़त

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, ऐसे में सभी प्रमुख दल पिछले चुनाव की उपलब्धि या उससे बड़ी जीत दोहराने के प्रयास में जुटे हैं। कई पार्टी ने तो कुछ राज्यों में अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है, वही कई राज्यो में उम्मीदवारों की घोषणा के लिए पार्टी कार्यकर्ता से चर्चा की जा रही है। राजस्थान के अलवर जिले की लोकसभा सीट का मुकाबला रोमांचक होने वाला है। क्योंकि यहां से कांग्रेस पार्टी से पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह का मुकाबला भाजपा के पूर्व राज्य मंत्री जसवंत सिंह यादव से या फिर पूर्व सांसद महंत चांदनाथ के शिष्य बालक नाथ से हो सकता है। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव में अलवर जिले ने भाजपा को चार सांसद दिए, लेकिन 2019 आते-आते लोकसभा सदस्यों की संख्या घटकर दो हो गई है। जिस कारण अलवर जिले में भाजपा के लिए चुनौती बड़ी है। भाजपा को पिछली उपलब्धि दोहराने के लिए अलवर ही नहीं, समीपवर्ती भरतपुर, दौसा व जयपुर ग्रामीणों पर भी जीत का परचम फहराना होगा। यही भाजपा के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है। पिछली बार सांसदों की नर्सरी साबित हुए पूर्वी राजस्थान में इस बार भाजपा को जीत की पुरानी उपलब्धि दोहरा पाना आसान नहीं रह गया है। कारण है कि गत लोकसभा चुनाव के बाद चारों सीटों पर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं।

अलवर लोकसभा में आती है 8 विधानसभा क्षेत्र

अलवर सांसद को अलवर शहर, अलवर ग्रामीण, रामगढ़, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़, किशनगढ़बास, मुण्डावर, तिजारा व बहरोड़ के मतदाता चुनने में अपनी भागीदारी निभाते है। इसके अलावा अलवर जिले के मतदाता भरतपुर, दौसा व जयपुर ग्रामीण के सांसद चुनने में अपनी भागीदारी देते है। वैसे अलवर जिले में 11 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें कठूमर के मतदाता भरतपुर, थानागाजी के दौसा एवं बानसूर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता जयपुर ग्रामीण सांसद चुनते है।

उपचुनाव में कांग्रेस ने वापसी

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में अलवर, भरतपुर, दौसा व जयपुर ग्रामीण के चारों सीटों पर भाजपा के सांसद चुने भेज गए थे, लेकिन साढ़े चार साल आते-आते भाजपा के चार सांसदों में से दो ही रहे है। अलवर लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस ने जबरदस्त वापसी की थी। वहीं दौसा लोकसभा क्षेत्र से हरीश मीणा विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। इस वजह से यह क्षेत्र भाजपा और कांग्रेस के लिए अहम माना जा रहा है।

लोकसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस को लगा झटका

अलवर जिले की रामगढ़ पंचायत समिति की प्रधान आभा नितिन जैन ने नाराजगी जताते हुए पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन इस्तीफा को स्वीकार नही किया गया। रामगढ़ प्रधान आभा नितिन जैन ने कहा है कि मैंने इस्तीफा जिलाध्यक्ष के नाम पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को दिया। जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया और फाड़ कर फेंक दिया। जब तक हमारी मांग नहीं मानी जाती, तब तक नाराजगी बनी रहेगी।

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