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लोकसभा चुनाव 2019: गिरिराज सिंह का गणित बिगाड़ेगा महागठबंधन

लोकसभा 2019,

“बिहार के सियासत गलियारों में आजकल एक चर्चा आम हो रही है जिसके अनुसार क्या इस बार लोकसभा की सिढ़ियां चढ़ सकेंगे सांसद गिरिराज सिंह। भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड कहे जाने वाले सांसद गिरिराज सिंह को लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने की आशंका कुछ कम ही नजर आ रही है।”

ले पंगा न्यूज डेस्क। नवादा सीट के लिए कहा जाता है कि नवादा संसदीय क्षेत्र की जनता एक उम्मीदवार को एक बार से ज्यादा मौका नहीं देती है। 16 लोकसभा चुनावों में सिर्फ एक उम्मीदवार कुंवर राम को ही जनता ने दोबारा मौका दिया। 1980 और 1984 में कांग्रेस के टिकट पर जीतकर कुंवर राम नवादा से लोकसभा गए थे।

बिहार की राजधानी पटना के दक्षिण-पूर्व में 93 किलोमीटर की दूरी पर नवादा स्थित है। इतिहास में इसका प्रसंग पाडंवों के अज्ञातवास से जुड़ा है। नवादा जिला की सीमा दक्षिण में झारखंड के कोडरमा जिले से लगती है। नवादा जिला मुख्य रूप से गन्ने की खेती के लिए जाना जाता है। हैंडलूम और बीड़ी जैसे छोटे उद्योगों में भी काफी तादाद में स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

इस लोकसभा सीट पर बीजेपी और आरजेडी के बीच कांटे की टक्कर रही है। पहले के चुनावों में यहां की जनता ने बीजेपी और आरजेडी को एक-एक कर मौका दिया है। आजादी के बाद इस सीट से 5 बार कांग्रेस के उम्मीदवार जीते। वहीं 1989 और 1991 के चुनाव में सीपीएम उम्मीदवार की जीत हुई थी। 1996 के चुनाव में भाजपा ने जीत हुई, वहीं 1998 में आरजेडी उम्मीदवार की जीत हुई। 1999 में नवादा सीट से बीजेपी के संजय पासवान जीतकर लोकसभा पहुंचे। 2004 में एक बार फिर आरजेडी को जनता ने मौका दिया।

2009 के चुनाव में बीजेपी ने डॉ. भोला सिंह को यहां से टिकट दिया, जिसके बाद उन्होंने एलजेपी की वीणा देवी को हराकर इस सीट पर कब्जा किया। 2014 के चुनाव में बीजेपी ने गिरिराज सिंह को यहां से मैदान में उतारा। मोदी लहर में गिरिराज सिंह ने आरजेडी के राजवल्लभ प्रसाद को करारी मात दी। बाहुबली कहे जाने वाले सूरजभान ने 2009 में यहां से चुनाव लड़ा था। उनकी पत्नी वीणा देवी भी यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं। 2014 में वीणा देवी लोजपा के टिकट पर मुंगेर से जीतकर सांसद बनीं।

नवादा सीट का समीकरण

नवादा संसदीय क्षेत्र में वोटरों की कुल संख्या 1,397,512 है। जिनमें से 652,177 महिला मतदाता और 745,335 पुरुष मतदाता हैं। महागठबंधन के लिए भूमिहार वोटों में बिखराव और मुस्लिम-यादव वोटों के समीकरण से ही कुछ उम्मीद बन सकती है।

विधानसभा सीटों का समीकरण

नवादा संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की 6 सीटें आती हैं- बरबीघा, रजौली, हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर और वारसलीगंज। इनमें से रजौली सुरक्षित सीट है। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में इनमें से 2-2 सीटें कांग्रेस-आरजेडी और बीजेपी के खाते में गईं।

2014 चुनाव का जनादेश

16वीं लोकसभा चुनाव में नवादा सीट से बीजेपी के गिरिराज सिंह जीते थे। उन्होंने आरजेडी के राजवल्लभ यादव को हराया था. गिरिराज सिंह 3,90,248 वोटों के साथ विजयी रहे। वहीं राजवल्लभ यादव को 2,50,091 वोट हासिल हुए थे। तीसरे नंबर पर जेडीयू के कौशल यादव को 1,68,217 वोट मिले।

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

नवादा से सांसद गिरिराज सिंह भाजपा के फायर ब्रांड माने जाते है। गिरिराज सिंह बीजेपी में नरेंद्र मोदी के बड़े समर्थक है। अपने बयानों के लिए वे अक्सर विवादों में रहते हैं। अप्रैल 2016 में उन्होंने अपनी टिप्पणी के साथ एक विवाद को जन्म दिया, जिसमें कहा था कि जनसंख्या को नियंत्रित किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि परिवार में सभी धर्मों के लोगों की संख्या समान हो। अक्टूबर 2016 में उन्होंने हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने का आग्रह किया, जिलके बाद विवाद शुरू हो गया था। 4 नवंबर 2016 को फिर से, गिरिराज सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत में हिंदुओं को देश में अपनी आबादी बढ़ाने की आवश्यकता है।

राजनीतिक कैरियर

गिरीराज सिंह ने 2005 से 2010 तक सहकारिता मंत्री और 2010 से 2013 तक पशुपालन मंत्री के रूप में बिहार के मंत्रिमंडल में रहे। वे शुरू से ही नरेंद्र मोदी के कट्टर समर्थक रहे हैं। वे उन 11 भाजपा मंत्रियों में शामिल थे, जिन्हें जदयू-भाजपा गठबंधन टूटने के परिणामस्वरूप नीतीश कुमार ने बर्खास्त कर दिया था। वह बिहार राज्य भारतीय जनता पार्टी की 16 सदस्यीय राज्य चुनाव समिति के सदस्य हैं।

आपकों बता दें कि 16वीं लोकसभा के दौरान उन्होंने 8 बहसों में हिस्सा लिया, जिसमें विभिन्न मुद्दों से जुड़े 8 सवाल उन्होंने पूछे। वे संसद की कई समितियों में भी शामिल रहे। गिरिराज सिंह 2014 में चुनाव जीतकर मोदी मंत्रिमंडल में मंत्री बने।

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