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लोकसभा चुनाव 2019: चुनाव आयोग के बड़े फैसले, ईवीएम की होगी ट्रैकिंग

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क, प्रीति दादूपंथी। रविवार 10 मार्च को निर्वाचन आयोग ने आम चुनाव का कार्यक्रम जारी करने के साथ चुनावी प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की है। चुनाव आयोग लोकसभा चुनाव साफ-सुथरे चुनाव कराने की बात कह रहा है, जिसके लिए कई बड़े कदम और अहम फैसले लिए है। इसमें सबसे अहम है आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को उनके खिलाफ मामलों की जानकारी अखबार में 3 बार विज्ञापन देकर प्रकाशित करानी होगी। वहीं इस बार ईवीएम में प्रत्याशियों की तस्वीरें और सभी लोकसभा चुनाव में वीवीपैट के इस्तेमाल का ऐलान किया गया है। आईये एक नज़र डालते हैं निर्वाचन आयोग के 4 बड़े फैसले –

प्रत्याशियों की तस्वीरें होंगी

चुनाव आयोग ने ऐलान किया है कि सभी ईवीएम और पोस्टल बैलेट पेपर पर सभी प्रत्याशियों की तस्वीरें होंगी। जिससे मतदाता को उम्मीदवार को पहचान करने में आसानी होगी। वहीं चुनाव आयोग ने कहा कि कई बार एक जैसे नाम वाले प्रत्याशी चुनाव मैदान में होते हैं, जिसके चलते मतदाताओं को भ्रम होता है। ईवीएम में फोटों को शामिल कराने के लिए सभी प्रत्याशियों को अपना नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो रिटर्निंग ऑफिसर को देना होगा।

ईवीएम की जीपीएस से ट्रैकिंग होगी

चुनाव आयोग ने जिला मुख्यालय से ईवीएम मशीन को बूथ तक पहुंचाने और उसे मतगणना केंद्र तक ले जाने के दौरान वाहनों की जीपीएस से ट्रैकिंग होगी। इतना ही नहीं बूथों के निर्वाचन अधिकारियों की भी ट्रैकिंग की जाएगी, जिससे पता चल सकेगा कि चुनाव के दौरान उनकी गतिविधि कहां-कहां रही।

सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट होगा

चुनाव आयोग ने ईवीएम को लेकर राजनीतिक दलों की आशंकाएं दूर करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट की मांग को स्वीकार करने का कदम उठाया है। इस बार सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट मशीन युक्त ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। वीवीपैट की सहायता से मतदाता को उसके मतदान की पर्ची देखने को मिलती है। आयोग ने बताया कि वीवीपैट और ईवीएम से मिलान का कार्य पहले की तरह से ही होगा और एक विधानसभा सीट के मतदान बूथ पर ही यह मिलान करवाया जाएगा। ईवीएम और वीवीपैट की त्रिस्तरीय जांच होगी, पहले स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने पड़ताल की जाएगी। दूसरे स्तर पर मतदान से पहले सभी बूथ पर इनका परीक्षण होगा और कुल वोटों का वीवीपैट से मिलान होगा। तीसरे स्तर पर मतदान के बाद प्रत्येक लोकसभा सीट की सभी विधानसभा सीटों में से एक-एक बूथ पर वोटों का वीवीपैट के जरिये मिलान कराया जाएगा।

आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवार को ब्यौरा देना होगा

आयोग के अनुसार इस बार के लोकसभा के चुनावों में नया यह है कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों को नामाकंन करने के बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामलों का विज्ञापन देना होगा। यह विज्ञापन व्यापक सर्कुलेशन वाले अखबारों में ही देना होगा, यानी वे छोटे अखबारों में विज्ञापन देकर बच नहीं सकेंगे। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉम्फ्रेंस में बताया कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2018 के संविधान पीठ के फैसले को ध्यान में रखते हुए यह नियम जारी किया गया है।

चुनाव आयोग की अन्य फैसले

वहीं चुनाव आयोग के कई अन्य बड़े फैसले भी लिये है, जिसके अनुसार करीब सारे मतदाताओं की फोटोयुक्त सूची तैयार की गई है। मतदाताओं के लिए नया हेल्पलाइन नंबर तैयार किया गया है। वहीं दूसरी ओर आचार संहिता का उल्लंघन होने पर बड़ी कार्यवाई की जाएगी। चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाताओं की फोटोयुक्त सूची तैयार कर ली गई है। वर्ष 2009 से इसका इस्तेमाल शुरू हुआ था, लेकिन तब असम, जम्मू-कश्मीर और नागालैंड में फोटो इलेक्टोरल रोल्स तैयार नहीं हुए थे। अब सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में फोटोयुक्त मतदाता सूची काम 99.36 प्रतिशत पूरा हो गया है। चुनाव के समय तक यह सौ प्रतिशत तक हो जाएगा। चुनाव के पांच दिन पहले मतदाताओं तक मतदान पर्ची पहुंच जाएगी।

1960 में आचार संहिता पहली बार लागू हुई थी

आदर्श आचार संहिता पहली बार केरल विधानसभा चुनाव में 1960 में लागू हुई। वहीं 1962 में लोकसभा और कई विधानसभा चुनाव में इसे प्रभावी बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार 2013 में राजनीतिक दलों के घोषणापत्र को शामिल किया गया। आचार संहिता में प्रचार, रैली, पोलिंग बूथ, सत्तारूढ़ दल और घोषणापत्र संबंधी महत्वपूर्ण दिशा निर्देश है।

आचार संहिता के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

सीईसी ने घोषणा कि है आचार संहिता के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच नहीं हो सकेगा। चुनाव आयोग हर बूथ पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करेगा। संवेदनशील बूथों पर सीआरपीएफ को तैनाती किया जाएगा। इस बार करीब दस लाख बूथ बनाए गए है। आचार संहिता के दौरान केंद्र या राज्य सरकारें कोई लोकलुभावन घोषणा नहीं कर सकेंगी। वहीं चुनाव के दौरान सरकारी पदों या साधनों का प्रचार के लिए इस्तेमाल नहीं होगा। राजनीतिक दल बिना पूर्व सूचना, अनुमति के रैली और सभा नहीं कर पाएंगे। मंत्री या कोई अन्य अधिकारी किसी नई परियोजना के लिए अनुदान नहीं दें सकेंगे। वोटरों को लुभाने के लिए शराब, धन या अन्य साधनों के इस्तेमाल पर कार्रवाई की जाएगी।

मतदाता वक्त रहते मत की पुष्टि कर लें

सीईसी ने कहा है कि वोटरों के लिए नया हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी किया गया है। जिस पर कोई भी वोटर लिस्ट में अपने नाम की जानकारी ले सकता है। आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत के लिए एप बनाया गया है। इस पर शिकायत मिलने के 100 मिनट के अंदर संबंधित अधिकारी कार्रवाई करेंगे।

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