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लोकसभा चुनाव 2019: जयंत- रालोद में अस्तित्व की लड़ाई

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ले पंगा न्यूज डेस्क, प्रीति दादूपंथी। लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान पूरे देश की नजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सियासी गढ़ कहे जाने वाले बागपत पर है। यह सीट देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और उनके बेटे अजीत सिंह के कर्म क्षेत्र के रूप में जाती है। परंतु 2014 में मोदी लहर के दम पर बीजेपी ने यहां परचम लहराया और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए है। वहीं रालोद प्रमुख अजीत सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

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वजूद बचाने की चुनौती

2019 का लोकसभा चुनाव रालोद के लिए अस्तित्व की लड़ाई भी माना जा रहा है। बागपत की सियासत में सबसे ज्यादा दखल जाट समुदाय से आने वाले चौधरी परिवार की रही है। इस परिवार से यहां के मतदाताओं का 1998 और 2014 को छोड़कर कभी मोहभंग नहीं हुआ है। रालोद के सामने 2019 के चुनाव में जीत दर्ज कर सियासी वजूद बचाने की चुनौती होगी।

संसदीय सीट का इतिहास

1977 से 1984 तक चौधरी चरण सिंह इस सीट पर काबिज रहे। उनके बाद चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह ने 1989 से इस विरासत को संभाला। तब से 1998 और 2014 को छोड़कर अजीत के पास यह सीट रही। जानकार सूत्रों की मानो तो भाजपा यहां से एक बार फिर सत्यपाल सिंह को मौका दे सकती है। अजीत सिंह के पुत्र जयंत के सामने अपने परिवारिक गढ़ को बचाने की जद्दोजहद होगी। 2014 में जयंत ने मथुरा से चुनाव लड़ा था और हार गए थे। हालांकि इस सीट से उन्होंने 2009 में जीत हासिल की थी।

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