विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर प्रसाद ने कहा – पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा।

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ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। विदेश मंत्री बनने के बाद एस जयशंकर ने पूर्व विदेश मंत्री के कामों की तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया भर में मुश्किलों में फंसे भारतीयों की मदद करना जिम्मेदारी है। और इसने विदेश मंत्रालय की छवि को पूरी तरह से बदल दिया है। जयशंकर ने कहा कि पहले भारतीयों के मन में दूतावासों को लेकर जो छवि थी वो यह थी कि जिन लोगों की ऊंची पहुंच होती है उन्हीं का काम होता है। बता दें कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने CII और थिंक टैंक अनंत एस्पेन सेंटर के कार्यक्रम में बोलते यह बात कही।

जयशंकर जारी रखेंगे सुषमा की परंपरा

 

विदेश मंत्री ने कहा की भारतीयों के मन में दूतावासों की जो छवि बनी हुई थी उसे पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बदल दिया है। सुषमा ने सोशल मीडिया के ज़रिए जो शुरूआत की उससे अब लोगों की उम्मीदें हैं, उन्हें जवाब मिलता है और विदेश मंत्रालय ज़मीन से जुड़ा है। बता दें कि विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्ति के कुछ ही घंटों के बाद ये साफ हो गया था कि ट्विटर पर आम लोगों की मदद की सुषमा स्वराज की शुरू की हुई परंपरा को विदेश मंत्री एस जयशंकर भी जारी रखेंगे।

बिम्सटेक, सार्क व पड़ोसी देशों पर बोले जयशंकर

 

विदेश मंत्री जयशंकर ने बिम्सटेक और सार्क के बारे में बात करते हुए कहा कि दक्षिण एशियाई देशों को इस बात का पता है कि कनेक्टिविटी से दूर रहकर वो आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। सार्क की समस्या सबको पता है। अगर आतंकवाद को परे रखकर भी सोचें तो कनेक्टिविटी वहां पर नहीं हो पा रही। इससे अलग बिम्सटेक में एक ऊर्जा है और वो आगे बढ़ने को तैयार है। नई सरकार के शपथग्रहण में भी बिम्सटेक देशों के प्रमुखों को आमंत्रण इसी से जुड़ा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने पड़ोसी देशों का जिक्र करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में विकास की मुख्य ज़िम्मेदारी भारत की है। इससे यहां बाकियों का भी विकास होगा। पड़ोसियों के लिये दिल बड़ा रखना होगा, उन्होंने कहा कि अगर उनकी और से वैसा ही व्यवहार नहीं आए तो भी दिल बड़ा रखना होगा।

कभी नहीं सोचा था कि विदेश मंत्री बनेंगे

जब उनसे विदेश मंत्री के तौर पर कामकाज के बारे में सवाल पूछा गया तो जयशंकर ने जवाब दिया कि एक हफ़्ते पहले तक उन्होंने सपने में नहीं सोचा था कि वो विदेश मंत्री बन जाएंगे। मंत्रालयों में समन्वय पर ज़ोर देते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछला एक हफ़्ता जितना वक्त उन्होंने अपने मंत्रालय में नहीं बिताया उससे कहीं ज्यादा वक्त वित्त और वाणिज्य मंत्रालयों में बिताया है। लेकिन ये समन्वय ज़रूरी है और अपनी ज़मीन पकड़ कर रखने वाली पुरानी सोच बदलनी होगी। उन्होंने ये भी कहा कि जैसे प्रधानमंत्री मोदी अलग-अलग प्रोजेक्ट का रिव्यू करते हैं वैसे ही वो भी विदेश मंत्रालय के प्रोजेक्ट्स का महीने में कम से कम दो बार रिव्यू करना चाहते हैं।

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