विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर यूनिसेफ ने अपने इस नए प्रोजेक्ट का रखा ये खास नाम

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ले पंगा न्यूज डेस्क, धीरज सैन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत योजना में विश्व पर्यावण दिवस पर यूनिसेफ ने एक स्टडी के माध्यम से यह पाया है कि भारत में शौच से न मुक्त हुए गाँवों में भूजल 12% ज़्यादा प्रदूषित है। साथ ही साथ प्रदूषण मिटटी, खाने और पीने के पानी में भी (ओडीएफ) शौच से मुक्त हुए गांवों से ज़्यादा पाया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस पर यूनिसेफ ने अपने एक प्रोजेक्ट की रिपोर्ट शेयर करी यूनिसेफ ने अपने इस प्रोजेक्ट का नाम एनवायर्नमेंटल इम्पैक्ट ऑफ द स्वच्छ भारत मिशन ऑन वॉटर, सॉइल एंड फूड नाम दिया। इसके चलते ओडिशा, बिहार और बंगाल में शौच से मुक्त (ओडीएफ) और शौच से न मुक्त (नॉन-ओडीएफ ) गाँवो का सैंपल लेकर यह रिपोर्ट तैयार करी।

खबर के मुताबिक केंद्रीय मंत्री का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान के चलते (ओडीएफ) शौच से मुक्त हुए गांवों में पर्यावण और स्वास्थ में बहुत सुधार आया है साथ ही इस स्वच्छता अभियान के चलते स्वच्छता की और लोगों की जागरूकता में भी बढ़ावा हुआ है। अब सरकार स्वच्छता के साथ पेयजल (पीने के पानी) पर भी गौर करेगी। जिसे घर घर नल योजना के नाम से भी जाना जा सकता है। स्वच्छ भारत योजना के तहत सरकार ने जगह जगह शौचालय का निर्माण संग कचरा समेटने वाली गाड़ी की भी शुरुआत की है। जिसके चलते आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम और अंडमान निकोबार 100% ओडीएफ घोषित हो चुके हैं।

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