शिवसेना में बगावत शुरू,सेना प्रमुख के निर्णय पर सवाल उठाने शुरू

लोकसभा 2019,

शिवसेना में बगावत शुरू हो गई है ,अपनों ने ही अब सेना प्रमुख के निर्णय पर सवाल उठाने शुरू कर दिए है .बी जे पी से गटबंधन के बाद शिवसैनिक असहज महसूस कर रहे है ,
शिवसेना के चंद्रपुर ज़िले की वरोरा विधानसभा के विधायक पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए। दूसरी ओर, सिंधुदुर्ग ज़िले में बनने वाली नाणार रिफ़ाइनरी प्रोजेक्ट को रद्द करने का जो निर्णय किया है, उस कारण भाजपा ज़िलाध्यक्ष प्रमोद जठार पार्टी छोड़ रहे हैं।


जालना में के प्रदेश अध्यक्ष राव साहब दानवे के समक्ष शिवसेना विधायक व मंत्री अर्जुन खोतकर का पेच अभी तक सुलझा नहीं है। खोतकर से रविवार को दानवे ने मुलाक़ात की, लेकिन अंतिम निर्णय अब उद्धव ठाकरे को करना है। मुंबई उत्तर -पूर्व लोकसभा में भी ऐसा ही पेच है, यहाँ भाजपा के वर्तमान सांसद किरीट सोमैया को लेकर शिव सैनिकों में नाराज़गी है।
साढ़े चार साल तक एक दूसरे के खिलाफ खुलकर आरोप -प्रत्यारोप करने वाली भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के लोकसभा चुनाव से पूर्व  शीर्ष स्तर पर किये गए गठबंधन का ज़मीनी स्तर पर विरोध अब सामने आने लगा है। इसके चलते शिवसेना को पहला झटका एक विधायक खोकर लगा है तो भाजपा को ज़िलाध्यक्ष गंवाकर।

इसके अलावा चंद्रपुर ज़िले की वरोरा विधानसभा से  शिवसेना विधायक बालु धानोरकर भी कांग्रेस में शामिल हो गए। वह चंद्रपुर लोकसभा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। वह गठबंधन होने से नाराज़ थे और लोकसभा लड़ने की इच्छा उन्होंने उद्धव ठाकरे तक पहुँचाई भी थी।

बीएमसी चुनाव के दौरान बीजेपी नेता किरीट और आशीष शेलार ने चुनाव प्रचार में शिवसेना को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया था, उससे उद्धव ठाकरे भी नाराज़ हैं।
उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ गठबंधन पर हुई बातचीत में इस मुद्दे को उठाया था। यही वजह थी कि जब गठबंधन की घोषणा के लिए अमित शाह मुंबई में उद्धव ठाकरे के साथ प्रेस कांफ्रेंस करने पहुँचे, वहाँ पहले से उपस्थित किरीट को सन्देश आया और वे बाहर चले गए थे।बालाकोट में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर जिस तरह से भाजपा नेता बयानबाजी कर रहे हैं, उसे लेकर भी शिव सैनिक परेशान हैं। कुछ दिन पहले ही दक्षिण मुंबई लोकसभा क्षेत्र के शिव सैनिकों ने भाजपा की कमल ज्योति यात्रा की  शिकायत उद्धव ठाकरे से की।उन्होंने बताया कि किस तरह से भाजपा के सांसद-विधायक और नेता, भारतीय वायु सेना की कार्रवाई का श्रेय ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में होर्डिंग और पोस्टर लगा कर भाजपा अपने आप को नंबर वन पार्टी बता रही है और लोगों की भावनाओं को युद्ध के नाम पर भड़का रही है। शिव सैनिकों की इस नाराज़गी पर उद्धव ठाकरे ने उन्हें यह समझाने का प्रयास किया कि अब गठबंधन हो चुका है और हमें अपना दोस्ताना चेहरा ही दिखाना है। सूत्रों के अनुसार शिव सैनिकों ने उस समय तो किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन वे शिवसेना प्रमुख के जवाब से संतुष्ट भी नहीं दिखे।

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