सिर्फ तीन तलाक़ पर कानून काफी नहीं सभी मुस्लिम कानूनों पर हो स्थिति साफ़!

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। सरकार के तीन तलाक़ के कानून ख़त्म करने के बाद मुसलमानों से जुड़े तीन तलाक़ को लेकर स्थिति साफ़ हो गई है परन्तु मुसलमानों से जुड़े कई कानूनों पर अभी स्थिति साफ़ करना जरुरी हो जाता है। हाल ही में एक मामला सामने आया है,जिसमे एक मुस्लिम लड़की ने अपनी मर्जी से विवाह करने का मामला सामने आया है। जिसमे लड़की की मेडिकल जाँच में उसकी उम्र 16 साल बताई गई है। इस मामले पर आयोध्या की निचली अदालत ने लड़की को नाबालिग मान कर लड़की को आश्रय गृह भेजने के निर्देश दिए गए थे। आश्रय गृह भेजने के निचली अदालत के निर्देश को चुनौती देते हुए लड़की ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाई कोर्ट में भी लड़की को राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट में लड़की का निकाह शुन्य करार कर दिया गया। अब लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हक़ की गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली है। सुप्रीम कोर्ट का मुस्लिम लड़की बालिग है या नाबालिग इस पर फैसला आना बाकि है।

लड़की ने अपनी याचिका मे कहा है की मुस्लिम कानून के हिसाब से लड़की की रजस्वला आयु 15 वर्ष है और उसके बाद वह अपने फैसले लेने में सवतंत्र है और अपने पसंद के किसी भी लडके से शादी कर सकती है। लड़की ने अपने वकील द्वारा कोर्ट में कहा की हाई कोर्ट लड़की की शादी को मुस्लिम कानून के अनुसार मानने में विफल रहा है। लड़की ने अपने जीने के अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा का अनुरोध किया है। लड़की ने बताया की वह मुस्लिम कानून के मुताबिक़ बालिग है। उसने अपनी मर्जी से एक लडके से निकाह किया है और उसे अपने पति के साथ रहने का पूरा अधिकार है। वही लड़की के घरवालों ने पोलिस में लड़की के अपहरण की रिपोर्ट लिखवाई है। लड़की ने अपील की है की जब तक सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर फैसला ना आ जाए तब तक उसे आश्रय गृह में न रखा जाए।

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