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सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता से सुलझेगा अयोध्या विवाद

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ले पंगा न्यूज डेस्क अशोक योगी। अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता को लेकर थोड़ी देर में सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आखिरी सुनवाई बीती 6 मार्च को हुई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। लेकिन कई हिंदूवादी संगठन मध्यस्थता का विरोध कर रहे हैं, मुस्लिम पक्षकार और निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता के पक्ष में हैं। सुप्रीम कोर्ट आज मध्यस्थता के लिए जजों के नाम भी तय कर देगा। इस मामले को लेकर मध्यस्थता के लिए कितने और किन जजों का पैनल बनाया जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जजों ने कहा था कि इस मामले का समाधान मध्यस्थता से ही हो सकता है। इसके बाद निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा की तरफ से जजों के नाम भी सुझाए गए थे।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया मध्यस्थता का सुझाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस विवाद के दोनों हिंदू और मुस्लिम पक्षकार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुवाद कराने के बाद सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में दाखिल दस्तावेजों की सत्यता को लेकर उलझ रहे थे। तब इस विवाद का मध्यस्थता का सुझाव पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति एस ए बोबडे ने दिया है। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। पीठ ने मध्यस्थता के सुझाव पर कहा था, ‘‘ कि हम मध्यस्थता के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे है, आप सभी (पक्षकार) ने यह शब्द इस्तेमाल किया है कि यह मामला परस्पर विरोधी नहीं है, हम मध्यस्थता के लिए एक मौका देना चाहते हैं, चाहे इसकी एक प्रतिशत ही संभावना हो। पीठ ने आगे कहा था, ‘‘हम दोनों पक्षों की राय जानना चाहते हैं, हम नहीं चाहते कि सारी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिये कोई तीसरा पक्ष इस बारे में टिप्पणी करे।’’ इस मामले पर पीठ ने पक्षकारों से पूछा था, ‘‘क्या आप गंभीरता से यह समझते हैं कि इतने सालों से चल रहा यह पूरा विवाद संपत्ति के लिए है? हम सिर्फ संपत्ति के अधिकारों के बारे में निर्णय कर सकते हैं लेकिन हम रिश्तों को सुधारने की संभावना पर विचार कर रहे हैं।’’ इस मामले में सुनवाई के दौरान जहां कुछ मुस्लिम पक्षकारों ने कहा था कि वे इस भूमि विवाद का हल खोजने के लिए कोर्ट द्वारा मध्यस्थता की नियुक्ति के सुझाव से सहमत हैं, वहीं राम लला विराजमान सहित कुछ हिन्दू पक्षकारों ने इस पर आपत्ति करते हुये कहा था कि मध्यस्थता की प्रक्रिया पहले भी कई बार विफल हो चुकी है।

वो तीन-तीन जजों के नाम जो सुझाए गए

इस मामले की मध्यस्थता के लिए निर्मोही अखाड़ा और हिंदू महासभा की तरफ से तीन-तीन जजों के नाम सुझाए गए हैं। लेकिन हिंदू महासभा मध्यस्थता का विरोध कर रहा है हालांकि, उसकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता के लिए नाम दिए गए हैं। इनमें पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा, पूर्व सीजेआई जेएस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके पटनायक शामिल हैं वहीं, निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज कुरियन जोसेफ, एके पटनायक और जीएस सिंघवी का नाम दिया है. मुस्लिम पक्षकारों ने भी कोर्ट को नाम दिया है, लेकिन इसका खुलासा नहीं किया है।

यह कहा अयोध्या मामले में मध्यस्थता पर सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या विवाद पर मध्यस्थता होगी, कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए तीन सदस्यों का पैनल बनाया है। इस पैनल के सदस्य जस्टिस इब्राहिम, श्रीश्री रविशंकर और श्रीराम पंचू होंगे। पैनल की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस इब्राहिम खलीफुल्लाह करेंगे। इस पैनल को 8 हफ्ते के भीतर अपनी पूरी रिपोर्ट सौंपनी होगी, पैनल को 4 हफ्तों में शुरूआती रिपोर्ट देनी होगी। एक हफ्ते के भीतर मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू होगी। मध्यस्थता की मीडिया रिपोर्टिंग नहीं होगी। मध्यस्थता फैजाबाद में होगी।

यूपी उप-मुख्यमंत्री केपी मौर्य ने कहा, ”मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल नहीं उठाऊंगा, पहले भी किसी हल तक पहुंचने की कोशिशें हुई हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली, कोई भी रामभक्त या संत राम मंदिर के निर्माण में देरी नहीं चाहता है।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एआईएमपीएलबी के सदस्य और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा है कि हम पहले ही कह चुके हैं कि हम मध्यस्थता में सहयोग करेंगे। अब, हमें जो कुछ भी कहना है, हम इसे मध्यस्थता पैनल से कहेंगे।

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