सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष की सुनवाई

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ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। सुप्रीम कोर्ट में आयोध्या मामले की सुनवाई लगातार जारी है। हिन्दू पक्ष की दलीले पूरी हो चुकी हैं। मंगलवार को मुस्लिम पक्ष की और से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने मुस्लिम पक्ष की और से दलीले पेश की। अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा की राम जन्मभूमि और जन्मस्थान में काफी अंतर है। जन्मभूमि का दायरा काफी बड़ा है। जन्मभूमि का मतलब हो सकता है की भूमि के टुकड़े पर कही भी जन्म। जन्मस्थान से मतलब होता है की भूमि के किसी हिस्से पर जन्म। उन्होंने कहा की हिन्दुओं ने जन्मस्थान को जन्मभूमि कहकर उस स्थान पर हमेशा से कब्ज़ा होने का दावा किया।

धवन ने एक नक्शा दिखाकर कहा की हिन्दूओं का दावा है की बीच वाले गुंबद के नीचे ही रामलला का जन्म हुआ। मुस्लिम पक्ष का कहना रहा की हिन्दू यह दावा कैसे कर सकते हैं की राम का जन्म गुंबद के नीचे ही हुआ था? दिल्ली में तोड़ी गई 30 मस्जिदों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा दिल्ली में 30 मस्जिदों को तोडा गया, वह मस्जिदें 1947 में तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के आदेश पर बनाई गई थी। वहीं उस वक़्त के फ़ैजाबाद के कलक्टर केके नायर ने कहा की फ़ैजाबाद में मंदिर था जिसे तोडा गया। बाद में उन्हीं कि तस्वीर इमारत में लगाई गई। यह कहकर उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की सदर कलेक्टर हिन्दुओं के पक्ष में भेदभाव कर रहे थे। उनका यह भी कहना रहा की यह तो कहा जा सकता है की उस जगह दोनों पक्ष उपासना करते थे पर यह नहीं कहा जा सकता की वहां मस्जिद नहीं थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता धवन ने कुछ तस्वीरें पेश कर कहा की विवादित इमारत में अरबी लिपि में बाबर और अल्लाह उत्कीर्ण था। इमारत में कलमा भी लिखा हुआ है और राम राम भी लिखा हुआ है।धवन ने श्रीरामचरितमानस की सत्यता पर भी सवाल उठाए और उसे काल्पनिक ठहराने की कोशिश की। अधिवक्ता धवन ने कोर्ट को बताया की उन्हें कुछ लोगो से धमकियां मिल रही है इस पर कोर्ट ने तमिलनाडु के प्रोफ़ेसर एन. षणमुगन को नोटिस भी जारी किया है। धवन ने संजय कलाल बजरंगी के धमकी भरे व्हाट्सअप मेसेज भी कोर्ट को दिखाए।

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