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सैनिकों के नाम पर वोट मांगने वाले मोदी के खिलाफ सैनिक लड़ रहा चुनाव, सपा ने दिया टिकट

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज। देवेन्द्र कुमार। दो साल पहले जिस तेज बहादुर ने रोटी की मांग की थी, उस बहादुर को ही कायर बना कर उससे उसका तेज और रोटी दोनों छीन लिए गए थे। अब वहीं कायर बनाया गया बहादुर एक बार फिर से बहादुर बन कर सैनिकों के हक के लिए लड़ रहा है। बता दें कि तेज बहादुर वाराणसी सीट से नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने मोदी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरा था। लेकिन अब उन्होंने महागठबंधन से सपा ने अपना प्रत्याशी बनाया है। अब तेज बहादुर सपा के टिकट पर मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। गौरतलब है कि सपा ने इससे पहले वाराणसी सीट से शालिनी यादव को टिकट दिया था और उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया। चर्चा है कि अब शालिनी अपना नामांकन वापिस लेंगी। पूर्व राज्यमंत्री एवं पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज राय धूपचंड़ी तेज बहादुर को लेकर नामांकन स्थल पर गए। और मनोज ने मीडिया को इस बात की जानकारी दी।

मोदी को आईना दिखाने के लिए लड़ रहे हैं चुनाव

गौरतलब है कि तेज बहादुर यादव ने हाल ही में इस बात का दावा किया था कि करीब दस हजार पूर्व सैनिक वाराणसी आकर असली चौकीदार के पक्ष में और नकली चौकीदार (पीएम मोदी) के खिलाफ घर-घर प्रचार करेंगे। उन्होंने कहा था, ‘मैं हार-जीत के लिए नहीं, बल्कि पीएम मोदी को आईना दिखाने के लिए चुनाव मैदान में उतरा हूं। जनता को बताऊंगा कि सैनिकों का हितैषी होने का दावा करने वाले पीएम मोदी ने सैनिकों से किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। पूर्व सैनिक घर-घर जाकर बताएंगे कि मोदी जी ने सैनिकों का क्याक हाल कर रखा है। सच्चाूई पता चलने पर पब्लिक हमारे साथ खड़ी होगी।’

अंतिम चरण में होंगे वाराणसी सीट पर चुनाव

लोकसभा चुनाव 2019 में वाराणसी सीट पर चुनाव अंतिम चरण में होंगे। इस सीट पर शनिवार तक कुल 31 प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर चुके हैं। यहां से 73 लोगों ने पर्चे खरीदे हैं। और कुल 106 लोगों ने नामांकन के लिए चालान कटवाया है।

जानिए कौन है तेज बहादुर

तेज बहादुर बीएसएफ से बर्खास्त पूर्व सैनिक हैं। तेज बहादुर ने सैनिकों को दिए जा रहे खराब खाने को लेकर इसका वीडियों बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड़ किया था। जो बाद में खूब वायरल हुआ था और तेज बहादुर चर्चा में आ गए थे। जनवरी 2017 में इस वायरल वीडियों ने पूरे देश का माहौल सर्दियों में गर्म कर दिया था। तेज बहादुर हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले हैं। गौरतलब है कि यादव ने कुछ विडियो पोस्ट किए थे जिनमें खाली हल्दी और नमक वाली दाल और साथ में जली हुई रोटियां दिखाते हुए खाने की क्वॉलिटी पर सवाल उठाए थे।

इसके बाद तेज बहादुर को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया था। तेज बहादुर पर सीमा सुरक्षा बल का अनुशासन तोड़ने को लेकर जांच की गई थी और फिर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं बर्खास्त होने के बाद तेज बहादुर ने कहा था कि वह न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने कहा था कि उनकी लड़ाई सारे सैनिकों के लिए है।

तेज बहादुर पर हुई थी जांच

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक NIA ने यादव की सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल, कॉल डीटेल्स और बैंक अकाउंट्स की जांच की थी। NIA ने अपनी यह रिपोर्ट पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को भी सौंपी थी। इस रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा कोई भी सबूत नहीं मिला है, जिससे ये साबित किया जा सके कि यादव की फेसबुक पोस्ट या फिर वीडियो से ‘देश की सुरक्षा’ को कोई खतरा था। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यादव का कोई विदेशी संबंध भी नहीं है। जांच एजेंसी ने कहा है कि यादव का मकसद सिर्फ जवानों को मिल रहे खाने की क्वालिटी में सुधार करवाना ही था। बता दें कि बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल केके शर्मा ने यादव के खिलाफ NIA जांच के आदेश दिए थे। तेज बहादूर 2032 में रिटायर होने वाले थे, लेकिन विवाद के बाद उन्होंने वीआरएस की अर्जी दे दी। जिसे अस्वीकार कर दिया गया।

जानिए आजकल क्या करते हैं तेज बहादुर

तेज बहादुर यादव इन दिनों ‘फौजी एकता न्याय कल्याण मंच’  के नाम से एनजीओ चला रहे हैं। यह एनजीओ ऐसे सैनिकों की कानूनी सहायता करेगी, जिन सैनिकों पर बिना किसी ठोस वजह के कार्रवाई की जाती है। किसी सैनिक के शोषण और प्रताड़ना की स्थिति में भी यह एनजीओ उसकी मदद करेगी। इसके लिए ‘फौजी एकता न्याय कल्याण मंच’ नाम से एक वेबसाइट भी बनाई गई है।

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