हाइड्रोजन लीकेज समस्या पर वैज्ञानिकों की जीत…

ले पंगा न्यूज डेस्क, चंदना पुरोहित। प्रधानमंत्री कार्यालय के और से हाल ही में फ्रंटियर ऑफ़ साइंस बैठक की शुरुआत की गई है। विभिन्न समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान को ढूंढना इस मीटिंग का उद्देश्य है। इस मीटिंग में विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले वैज्ञानिकों को बुलाया जाता है और विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिक संभावनाओं की चर्चा करते हैं।

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इस साल यह मीटिंग जयपुर में होगी। पिछली बार यह यह मीटिंग हैदराबाद में हुई थी। पिछली फ्रंटियर ऑफ़ साइंस मीटिंग में आईआईटी हैदराबाद के केमिकल इंजीनिरिंग विभाग के डॉ. चंद्रशेखर शर्मा और आईआईटी जोधपुर के इलेक्ट्रिकल विभाग के डॉ. महेश कुमार ने हाइड्रोजन लीकेज का पता लगाने के लिए सेंसर बनाने पर विचार किया था।

भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान आईआईटी जोधपुर और आईआईटी हैदराबाद ने मिलकर हयड्रोजन गैस लीकेज का पता लगाने के लिए एक माईक्रोसेन्सर बनाया है यह सेंसर पार्ट्स पर मिलियन स्टार पर लिक हो रही हाइड्रोजन की जानकारी देता है। इस से बहुत कम सांद्रता में लीकेज हो रही हाइड्रोजन की पहचान कर उससे होने वाले हादसे को रोका जा सकता है। इस सेंसर को हाइड्रोजन से चलने वाली कार और औद्योगिक कार्यो में काम लिया जा सकता है। यह सेंसर 1 गुना 1 मिलीमीटर आकार का है। इसे न्यूक्लियर प्लांट में भी लगाया जा सकता है। व्यावसाइक उपयोग होने पर इसकी कीमत मात्र 500 रूपए प्रति सेंसर हो सकती है।

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