holi

होली पर्व पुरानी दुश्मनी को मिटाकर फिर से दोस्त में भरता है रंग

धर्म,

ले पंगा न्यूज डेस्क, अशोक योगी। वसंत ऋतु में घर-घर में ढोल व रंग ही नजर आते है। वंसत ऋतु में भारतीय और नेपाली लोगों का महत्वपूर्ण त्यौहार होली मनाया जाता है। हिन्दू लोग धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार होली फाल्गुन मास की पुर्णिमा को मनाई जाती है। वैसे होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। रंगों के त्यौहार के नाम से जाने वाला यह उत्सव दो दिन तक मनाया जाता है। इस उत्सव में पहले दिन को होलिका दहन किया जाता है। दूसरे दिन धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन उत्सव में लोग ढोल बजा के साथ घर-घर जाकर एक-दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि लगाकर बधाई देते है। ऐसी मान्यता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।

पारंपरिक और सांस्कृति का प्रतीक है होली पर्व

होली का पर्व अपनी पारंपरिक और सांस्कृति मान्यताओं की वजह से मनाये जाने वाला हिंदुओं का सबसे पुराना त्यौहार है। इसके बारे में कई पवित्र ग्रंथों जैसे – वेद, पुराण, और धार्मिक पुस्तकों में जिक्र मिलता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार एक कहानी है, जोकि प्रहलाद और उसके पिता हिरण्याकश्यप और हिरण्याकश्यप की बहन होलिका से जुड़ी है। प्राचीन काल में हिरण्याकश्यप (राक्षस राजा) नामक राजा राज्य करता था। उसका एक पुत्र था जो भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था और उसकी एक बहन होलिका थी। एक बार हिरण्याकश्यप ने बहुत समय तक भगवान ब्रह्मा की तप किया। उसके बाद भगवान ब्रह्मा ने उसे वरदान दिया। इस वरदान से वह बहुत अधिक शक्तिशाली बन गया। जिससे हिरण्याकश्यप लोगों पर अत्यचार करने लगा और लोगों को कहने लगा कि मेरी पूजा करों आज से मैं ही भगवान हूं। उस समय बहुत से लोग कमजोर और डरे हुए थे। उन लोगों ने उसका अनुसरण करने लगे लेकिन उसका बेटा उसके फैसले से असहमत था। वह अपने पिता को भगवान मानने से इंकार कर दिया और कहा कि केवल एक ही भगवान को मैं मानता हूं वह है श्री विष्णु। इसके बाद तो हिरण्याकश्यप ने अपने पुत्र पर काफी अधिक अत्याचार किए, लेकिन प्रहलाद को भगवान की कृपा से कुछ नहीं हुआ। अंत में हिरण्याकश्यप ने अपने पुत्र को दंडित करने के लिए अपनी बहन से मदद मांगा। इसके बाद हिरण्याकश्यप की बहन होलिका ने प्रहलाद को मारने के लिए एक योजना बनाई। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था तो उसने इसी के अनुसार प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई। इसका परिणाम यह हुआ कि होलिका तो जल गई लेकिन प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ। फिर इसके बाद हिरण्याकश्यप बहुत अधिक गुस्सा हुआ और अपने पुत्र को मारना चाहा लेकिन भगवान विष्णु उसी समय प्रकट हो गये और हिरण्याकश्यप का वध कर दिया।

कई व्यंजन बनाएं जाते है होली पर

वसंत पंचमी के दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों की धुन के साथ नृत्य-संगीत व रंगों में डूब जाते हैं। चारों तरफ़ रंगों की फुहार फूट पड़ती है। नए कपड़े पहन कर होली की शाम को लोग एक दूसरे के घर होली मिलने जाते है जहाँ उनका स्वागत गुझिया,नमकीन व ठंडाई से किया जाता है। होली के दिन आम्र मंजरी तथा चंदन को मिलाकर खाने का बड़ा माहात्म्य है। होली के दिन घरों में खीर, पूरी और पूड़े आदि विभिन्न व्यंजन पकाए जाते हैं। इस अवसर पर अनेक मिठाइयाँ बनाई जाती हैं जिनमें गुझियों का स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। बेसन के सेव और दहीबड़े भी सामान्य रूप से उत्तर प्रदेश में रहने वाले हर परिवार में बनाए व खिलाए जाते हैं। कांजी, भांग और ठंडाई इस पर्व के विशेष पेय होते हैं।

Tag In

#त्यौहार वसंत पंचमी #दुर्लभ संयोग #देवगुरु बृहस्पति #फाल्गुनी #भगवान विष्णु #भद्रा काल #श्री विष्णु #हिन्दू #हिरण्याकश्यप #होलिका दहन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *