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2014 में जीती आठ सीटों पर क्या बीजेपी इस बार भी दोहरा पाएगी इतिहास

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज डेस्क। देवेन्द्र कुमार। इस बार के लोकसभा चुनाव कुल सात चरणों में होंगे। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में पहले चरण में 8 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इन आठों सीटों पर 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली थी। कैराना सीट पर 2018 में हुए लोकसभा चुनाव में बसपा और सपा के समर्थन से आरएलडी ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। पहले चरण के चुनाव 11 अप्रैल को होंगे इस दिन कुल 20 राज्यों की 91 सीटों पर चुनाव होंगे। जिसमें उत्तर प्रदेश की 8 सीटों पर चुनाव होगा। इस चरण में सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाज़ियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में मतदान होगा।

सहरानपुर सीट से बीएसपी की टिकट पर हाजी फजलुर्रहमान चुनाव मैदान में होंगे, जबकि कांग्रेस ने इमरान मसूद को मैदान में उतारा है। बीजेपी ने अभी इस सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। पार्टी अपने मौजूदा सांसद राघव लखनपाल को एक बार फिर उम्मीदवार बना सकती है। आपको बता दें कि इस सीट पर सपा-बसपा गठबंधन अपने दलित, जाट और मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने की पूरी कोशिश करेगा। सपा-बसपा का गठबंधन अपने इन वोटरों को अपने पाले में लाने के लिए सफल हो गया तो बीजेपी के लिए यह बुरी खबर हो सकती है।

जानिए इन सीटों का जातीय समीकरण

सहारनपुर संसदीय सीट पर करीब साढ़े 6 लाख मुस्लिम, पांच लाख दलित और 1 लाख जाट समुदाय के वोट हैं। इस सीट पर कुल 1,608,833 मतदाता हैं। कैराना लोकसभा सीट अब सपा के खाते में है। यहां से तबस्सुम हसन चुनाव लड़ेंगी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के हुकुम सिंह ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इस सीट से सासंग का निधन हो जाने के कारण हुए उपचुनाव में सपा के समर्थन से ये सीट आरएलडी जीतने में सफल रही थी। इस सीट पर जातीय समीकरण की बात करें तो यहां पर मुस्लिम सबसे ज्यादा हैं। इस सीट पर 5 लाख मुस्लिम, 4 लाख बैकवर्ड (जाट, गुर्जर, सैनी, कश्यप, प्रजापति और अन्य शामिल) और डेढ़ लाख वोट जाटव दलित समूदाय के हैं। इसके अलावा इस सीट पर करीब 1 लाख गैरजाटव दलित मतदाता हैं। जाट मतदाओं की बात करें तो करीब 2 लाख जाट वोटर हैं। सपा-बसपा- आरएलडी गठबंधन के तहत मुजफ्फरनगर सीट पर आरएलडी का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेगा। आरएलडी प्रमुख चौधरी अजित सिंह इस सीट से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। मुजफ्फरनगर सीट से बीजेपी और कांग्रेस ने अभी किसी प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारा है।

अगर बीजेपी की बात करें तो वो अपने मौजूदा सांसद संजीव बालियान को एक बार फिर चुनाव मैदान में उतार सकती है। इस सीट पर जातीय समीकरण की बात करें तो यहां करीब साढ़े 5 लाख मुस्लिम, ढाई लाख दलित, और करीब सवा दो लाख जाट मतदाता हैं। इसके अलावा करीब दो लाख वोट सैनी और कश्यप समाज के हैं। जाटों के गढ़ बागपत से इस बार अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी मैदान में उतर रहे हैं। पिछले चुनाव में 2 लाख से जीत दर्ज करने वाले बीजेपी के सत्यपाल सिंह की राह इस बार आसान नहीं नजर आ रही है।

जयंत चौधरी पिछले पांच साल से क्षेत्र में लोगों से सम्पर्क बनाने में लगे हुए हैं। चौधरी लगातार युवाओं मैं अपनी पैठ बना रहे हैं। आरएलडी की इस परंपरागत सीट से चौधरी चरण सिंह 1977, 1980 और 1984 में लगातार चुनाव जीते हैं। जयंत के पिता और आरएलडी के अध्यक्ष अजित सिंह भी 6 बार यहां से सासंद रहे। पश्चिम यूपी की मेरठ लोकसभा सीट से बसपा ने हाजी याकूब कुरैशी को मैदान में उतारा है। लेकिन भाजपा व कांग्रेस ने अभी तक इस सीट पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए हैं। अगर गाजियाबाद लोकसभा सीट की बात करें तो कांग्रेस ने डॉली शर्मा को यहां से उम्मीरदवार बनाया है।

सपा-बसपा गठबंधन के बाद सपा ने सुरेंद्र कुमार शर्मा (मुन्नी) को गाजियाबाद सीट से टिकट दिया है। नोएडा लोकसभा सीट से बसपा ने सतबीर नागर को मैदान में उतारा है, बीजेपी ने अभी उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि बीजेपी इस बार केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को मैदान में उतार सकती है। कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है। बुलंदशहर लोकसभा सीट से बसपा ने योगेश वर्मा को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस और बीजेपी ने अभी अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं की है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के भोला सिंह ने करीब 4 लाख मतों से जीत हासिल की थी। बिजनौर लोकसभा सीट पर मुस्लिम और गुर्जर वोटर ज्यारदा हैं। इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है और यहां से कुंवर भारतेंद्र सिंह सांसद हैं। इस सीट से तीनों पार्टियों में से किसी ने भी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। बीजेपी भारतेंद्र सिंह को एक बार फिर उतार सकती है।

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