कांग्रेस जीतेगी अशोक गहलोत का गढ़, जोधपुर !

लोकसभा 2019,

ले पंगा न्यूज़ डेस्क । लोकसभा चुनाव 2019 में कुछ ही माह का समय बचा है। जैसे-जैसे ये दिन निकलते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। राजस्थान में दिन-ब-दिन बढ़ती सियासी सरगर्मियों के बीच दोनों ही बड़े राजनीतिक दल दम-खम लगाते हुए लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। दोनों दल मिशन-25 को सेंटर में रख कर तैयारियों को अमलीजामा पहनाने में लगे हैं। इस बार राजस्थान का चुनावी रण दिलचस्त रहने वाला है। हाल ही में बीजेपी की बहुमत सरकार को विधानसभा चुनाव में पछाड़ कर राजस्थान की सत्ता में एन्ट्री करने के बाद से ही राजस्थान की संसदीय सीटों पर कब्जा करने का मानस बना चुकी कांग्रेस के लिए वैसे तो पूरी की पूरी 25 सीटें अहम है ही लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर की सीट ‘ हॉट सीट ‘ मानी जा रही है। यहां फिलहाल गजेन्द्रसिंह शेखावत बीजेपी से सांसद हैं, अब कांग्रेस यहां जीत हासिल कर बीजेपी से ये सीट छीनने की तैयारियों में दिन-रात जुटी है।

विधानसभा चुनाव में बाजी मार चुकी कांग्रेस लोकसभा में करेगी वापसी

वैसे तो जोधपुर संभाग सहित पूरे मारवाड़ में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की लोकप्रियता और व्यक्तित्व से हर कोई प्रभावित है और यही वजह है कि सीएम अशोक गहलोत का जादू हर किसी के सिर चढ़ कर बोलता है। जोधपुर के लाडले गहलोत ने सांसद से मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री बन जोधपुर के साथ पूरे मारवाड़ का मान बढ़ाया है। गहलोत का नशा हर वर्ग में जबरदस्त है। बात करें लोकसभा सीट जोधपुर की तो हाल ही के विधानसभा चुनाव में इस संसदीय सीट में आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 6 सीटों पर बीजेपी को पछाड़कर जीत हासिल की है। बीजेपी मात्र 2 सीटों पर ही सिमटकर रह गई थी।

विधानसभा के चुनावी समीकरणों के अनुसार जोधपुर लोकसभा सीट अब बीजेपी के हाथ से फिसलने वाली है। यहां अशोक गहलोत की लोकप्रियता बीजेपी के लिए हार का कारण रहने की चर्चाएं आम हो रही है। जिसे देखते हुए कांग्रेस का पलड़ा यहां भारी दिख रहा है। किसी समय सीएम अशोक गहलोत यहां से जीतकर केन्द्र की राजनीति में पहुंचे थे, इस कारण यह सीट ‘ हॉट सीट ‘ मानी जा रही है। गहलोत का विधानसभा क्षेत्र सरदारपुरा भी इसी संसदीय क्षेत्र में है।

आजादी के बाद से ही यहां कांग्रेस रही जीतने में आगे

आजादी के बाद से ही यहां कांग्रेस ने अपना दबदबा रखा है। आज तक हुए 16 आम चुनावों व 1 उपचुनाव में 8 बार कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की है। वहीं बीजेपी मात्र 4 बार ही यहां से जीत पाईं थी, तो 4 बार यहां निर्दलीयों ने बाजी मारी। भारतीय लोकदल ने भी एक बार यहां विजय हासिल करने में कामयाब रही। सबसे ज्यादा 8 बार जीतने वाली कांग्रेस ने यहां 1957, 1967, 1980, 1984, 1991, 1996, 1998 व 2009 अपना सांसद बनाया तो वहीं 1989, 1999, 2004 और 2014 में यहां बीजेपी ने जीत दर्ज की। प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत यहां से पांच बार सांसद रहे हैं। सीएम गहलोत माली समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और राजपूतों के वर्चस्व की सीट मानी जाने वाली जोधपुर संसदीय सीट पर गहलोत ने जीत हासिल कर सारी सियासी अटकलों को खारिज कर दिया था।

परिसीमन के बाद बदला इस सीट पर चुनावी समीकरण

बता दें कि, मारवाड़ की जोधपुर संसदीय सीट को जोधपुर और जैसलमेर जिले के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है। यह सीट साल 2008 में हुए परिसीमन के बाद राजपूत बाहुल्य हो गई, क्योंकि परिसीमन के बाद यहां का जाट बाहुल्य इलाका पाली क्षेत्र में चला गया। पहले जोधपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 10 सीटें आती थीं, लेकिन 2008 के परिसीमन में यहां की 2 जाट बहुल सीटों को पाली में शामिल कर दिया गया। अब यहां के कुछ सीटों पर बिश्नोई समाज के वोट तो कई इलाकों में मुस्लिम मतदाता हार-जीत का फैसला करते हैं।

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में जोधपुर लोकसभा क्षेत्र की 8 सीटें-पोकरण, फलोदी, लोहावट, शेरगढ़, सरदारपुरा, जोधपुर शहर और सूरसागर विधानसभा में 6 सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है जबकि बीजेपी को महज 2 सीट फलोदी और सूरसागर पर जीत पाईं है। इस तरह साल 2013 के विधानसभा चुनाव और गत लोकसभा चुनाव में अपना यह गढ़ बीजेपी के हाथों गंवा बैठी कांग्रेस ने दिसंबर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी की है और अब आगामी लोकसभा चुनाव में जीत के समीकरण तलाशने में जुटी है। हांलाकि विधानसभा चुनाव की जीत के आंकड़े तो यही कह रहे हैं कांग्रेस को इस बार यहां जीत हासिल करने में खास परेशानी नहीं आने वाली है।

मौजुदा सांसद गजेन्द्रसिंह शेखावत की सक्रियता

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जोधपुर लोकसभा सीट पर  62.4 फीसदी मतदान हुए थे, जिसमें बीजेपी को 66.2 फीसदी और कांग्रेस को 28.1 फीसदी वोट मिले थें। कांग्रेस से राजघराने की चंद्रेश कुमारी कटोच, बीजेपी से गजेंद्र सिंह शेखावत से 4,10,051 मतों के भारी अंतर से चुनाव हार गई थी। जिसमें शेखावत को 7,13,515 वोट मिले तो वहीं चंद्रेश कुमारी कटोच को 3,03,464 वोट मिले थे। राजस्थान की राजनीति में गजेन्द्रसिंह शेखावत की काफी सक्रियता देखी जा रही है। चाहे बात आनंदपाल एनकाउंटर के बाद राजपूतों के प्रदेश में किये गये आंदोलन की हो या फिर पद्मावति फिल्म विवाद में आंदोलन में मध्यस्तता में शेखावत अहम कड़ी थे।

इन विवादों के बाद राजूपत समाज में उपजी बीजेपी के खिलाफ नाराजगी को पाटने के लिए उन्हें केन्द्रीय मंत्री मंडल में जगह भी दी गई। बता दें कि, फिलहाल केन्द्र सरकार में कृषि राज्य मंत्री व बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव गजेंद्र सिंह शेखावत का जन्म 3 अक्टूबर 1967 में हुआ था। शेखावत ने जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से एमए और एमफिल की डिग्री हासिल की और 1992 में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक की पृष्ठ भूमि से माने जाने वाले शेखावत स्वदेशी जागरण मंच से भी जुड़े रहे हैं। शेखावत ने अपने सांसद विकास निधि के का 49.32 फीसदी अपने क्षेत्र के विकास पर खर्च किया गया है।

Tag In

#rajsthan govt ashok gahlot congrees rahul gandhi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *