AJL को खाली करना पड़ेगा हेराल्ड हाउस, दिल्ली हाईकोर्ट का समय देने से इंकार

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ले पंगा न्यूज़ डेस्क । कांग्रेस को नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने करारा झटका दिया है। कोर्ट ने मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखते हुए एजेएल को और समय देने से इंकार कर दिया है। बता दें कि, पिछले दिनों 21 दिसंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा एजेएल को हेराल्ड हाउस को खाली करने का आदेश दिया था जिसके बाद एजेएल ने डबल बेंच के सामने अपील लगाई थी। इस अपील में एजेएल ने आदेश के बाद कोर्ट से आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए 2 हफ्ते का समय मांगा था, लेकिन हाई कोर्ट ने वो समय देने से भी साफ इंकार कर दिया। दिल्ली हाई कोर्ट ने भारत-पाक सीमा पर जारी तनातनी के बीच कांग्रेस को यह जोर का झटका लगा है।

सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए समय देने से भी कोर्ट का साफ इंकार

दिल्ली उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने 21 दिसबंर को सिंगल बेंच के दिए गये आदेश को बरकरार रखते हुए मामले में आदेश दिया। नेशनल हेराल्ड के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड ने हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश के बाद कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए 2 हफ्ते का समय मांगा था जिसे डबल बेंच ने देने से इनकार कर दिया। हाई कोर्ट के आदेश के बाद एजेएल को अब 56 साल पुराने हेराल्ड हाउस खाली करना ही पड़ेगा। हालांकि सूत्र बता रहे हैं कि, एजेएल सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील करने वाली है।

अखबार छापने के लिए लीज पर ली जमीन का सही उपयोग नहीं – कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अखबार को छापने के लिए लीज पर दी गई जमीन का सही इस्तेमाल नहीं किया गया। फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए 2 हफ्ते का समय देने से भी मना कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में एलएनडीओ की तरफ से हेराल्ड हाउस को खाली करने के पिछले साल 31 अक्टूबर में भेजे गए नोटिस को सही ठहराया है। बता दें कि, इससे पहले 21 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने भी एजेएल को हेराल्ड हाउस को खाली करने का आदेश दिया था जिसके बाद एजेएल ने डबल बेंच के सामने अपील लगाई थी।

शेयर हस्तांतरित होने से राहुल-सोनियां गांधी हेराल्ड हाउस के मालिक नहीं – वकील की दलील

मामले में एजेएल की ओर से दलील पेश करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि कंपनी के बहुसंख्यक शेयर यंग इंडिया को हस्तांतरित होने से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी दिल्ली स्थित हेराल्ड हाउस के मालिक नहीं बन जाएंगे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी दलील दी कि केंद्र ने पिछले साल जून से पहले हेराल्ड हाउस में मुद्रण गतिविधियों की कमी का मुद्दा कभी नहीं उठाया था, तब तक जब इसके कुछ ऑनलाइन संस्करणों का प्रकाशन शुरू हो चुका था। बता दें कि इस मामले की सुनवाई में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की एक पीठ ने गत 18 फरवरी को केंद्र और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

अखबार के लिए दिया गया हेराल्ड हाउस, लेकिन 2008 से प्रकाशन ही बंद – केन्द्र सरकार

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि हेराल्ड हाउस को अखबार के लिए दिया गया था जबकि हेराल्ड हाउस में 2008 में ही अखबार का प्रकाशन बंद कर दिया गया और वहां के स्टाफ को स्वैच्छिक रिटायरमेंट देकर हटा दिया गया। ऐसे में जब वहां प्रकाशन का कोई काम ही नहीं हो रहा था तो सरकार के पास उस जगह के दुरुपयोग को रोकने के लिए इस लीज को रद्द करना अनिवार्य था। इसके अलावा इस बिल्डिंग में पासपोर्ट ऑफिस भी चल रहा है जिसका किराया एजेएल द्वारा ही वसूला जा रहा है। हालांकि, केंद्र की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से दलील दी गई थी कि जिस तरह से शेयरों का हस्तांतरण हुआ उसमें कोर्ट को यह देखने के लिए एजेएल पर पड़े कॉरपोरेट पर्दे के उस पार झांकना होगा कि ‘हेराल्ड हाउस’ का स्वामित्व किसके पास है।

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