अयोध्या मामला: इस माह तक सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्था ​समिति को दिया समय

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ले पंगा न्यूज डेस्क,धीरज सैन। सुप्रीम कोर्ट में आज पांच जजों की संवैधानिक पीठ में अयोध्या राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई की गई। अयोध्या मामले पर मध्यस्थता की प्रक्रिया के आदेश के बाद आज पहली बार उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एफएमआई ने उच्चतम न्यायालय में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस मध्यस्थता प्रक्रिया को पूरा करने की रिपोर्ट में उन्होंने 15 अगस्त का समय मांगा था। इसके बाद पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अयोध्या मामले पर सुनवाई आगे बढ़ा दी है। इसी के साथ उच्चतम न्यायालय ने मध्यस्थता समिति को तीन महीने का ​समय दिया है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में अब 15 अगस्त का समय मांगा है। बता दें​ कि मध्यस्थता समिति ने अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पांच जजों की पीठ को सौंपी थी। पांच जजों की पीठ का नेतृत्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने किया जिसमें न्यायमूर्ति एसए बोबडे, एसए नजीर, अशोक भूषण और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

इस मामलें में पिछली बैठक आठ मार्च को हुई थी। जिसमें पीठ ने कई सालों से अदालत के चक्कर लगा रहे राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद का समाधान बातचीत के जरिये निकालने के लिए रिटायर्ड जज फकीर मोहम्मद इब्राहिम की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल भेजा था। इस बाबत आज तीन सदस्यों वाली मध्यस्थता समिति ने कोर्ट से ओर समय मांगा। जिससे कई वर्षो से चले आ रहे इस मामलें में पर शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सके। जिसके बाद अदालत ने उन्हें 15 अगस्त तक का समय दे दिया। बहरहाल, बता दें कि अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में अभी 13 हजार 500 पेज का अनुवाद किया जाना बाकी है। अब 15 अगस्त के बाद ही पता चलेगा कि मध्यस्थता प्रक्रिया समिति ने अब तक क्या कार्यवाही की है। क्योंकि अदालत ने आदेश दिया था कि प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय होनी चाहिए।

ये हैं मामला:
बता दें कि 30 सितंबर, 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या के विवादित स्थल को रामजन्मभूमि करार दिया था। कोर्ट ने बताया कि रामलला विराजमान को वहीं जगह दी जाएगी, जहां पर वो विराजमान है। लेकिन इलाहाबाद कोर्ट के इस फैसले को पक्षकारों ने चुनौती दी है। जिसके बाद से फिलहाल यथास्थिति कायम है।

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