ICJ में भारत -पाक आमने सामने

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ताजातरीन आतंकवादी हमले के बाद जहां भारत-पाकिस्तान के रिश्तों मे आई दरार के बाद आज इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में दोनो देश आमने सामने है,18फरवरी 22फरवरी तक कुलभूषण जाधव मामले की की सुनवाई चलेगी।गौरतलब है कि इस मामले में पाकिस्तान की आर्मी कोर्ट ने सैतालिस साल के कुलभूषण जाधव को अप्रैल 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी  पाकिस्तान का आरोप है कि जाधव भारतीय जासूस हैं. जाधव एक रिटायर नेवी ऑफिसर हैं जिन्हें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ईरान से अपहृत कर लिया था.

चार दिनों तक चलेगी सुनवाई

सुनवाई की शुरुआत भारत के पक्ष से होगी. पाकिस्तान अपना पक्ष 19 फरवरी को रखेगा. 20 फरवरी को भारत पाकिस्तान के पक्ष का जवाब देगा. फिर 21 फरवरी को भारत के खिलाफ पाकिस्तान अपना पक्ष रखेगा. भारत की तरफ से कुलभूषण जाधव की पैरवी हरीश साल्वे करेंगे. इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए भारत के पास 3 घंटे होंगे. भारत चाहता है कि ICJ जाधव की मौत की सजा खत्म करवा दे.

कुलभूषण मामले में कब क्या हुआ? 25 मार्च 2016: भारत को जाधव की हिरासत की जानकारी मिली 10 अप्रैल 2017: पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट ने जाधव को मौत की सज़ा सुनाई 8 मई 2017: भारत ने ICJ का दरवाज़ा खटखटाया 15 मई 2017: मामले में सुनवाई हुई18 मई 2017: ICJ ने फांसी पर रोक लगाई 25 दिसंबर 2017: जाधव की मां और पत्नी ने पाक जाकर जाधव से मुलाकात की 28 दिसंबर 2017: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मुलाकात की जानकारी संसद को दी. 

आईसीजे में सोमवार को कुलभूषण जाधव मामले में सुनवाई शुरू हो गई. यहां 11 जजों की बेंच जाधव के भाग्य का फैसला करेगी. भारत की ओर से सीनियर एडवोकेट हरीश साल्वे उनका पक्ष रख रहे हैं.

वह जाने माने एडवोकेट हैं और सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर रह चुके हैं. साल 2015 में बॉलीवुड स्टार सलमान खान को सजा होने के कुछ घंटे बाद ही साल्वे ने अपने तर्क से उन्हें बेल दिला दी थी. इसके बाद वह सोशल साइट्स पर ट्रेंड होने लगे थे.

22 जून 1955 को महाराष्ट्र में जन्मे साल्वे मूलरूप से नागपुर के रहने वाले हैं. उनके दादा पीके साल्वे भी दिग्गज क्रिमिनल लॉयर रह चुके हैं. उनके पिता एन के पी साल्वे भारतीय क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं.

शुरुआती दिनों में हरीश साल्वे अपनी टैक्स लॉयर नानी के जूनियर के तौर पर काम करके कानूनी दाव-पेंच सीखते थे. साल 1976 में उन्होंने दिग्गज एडवोकेट सोली सोराबजी की देखरेख में प्रेक्टिस शुरू की थी. बाद में वह दिल्ली पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे.

साल 1999 में सुप्रीम कोर्ट में बने सॉलिसिटर

साल 1992 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से ‘सीनियर एडवोकेट’ की पदवी मिली. साल 1999 में उन्हें सॉलिसिटर बनाया गया, हालांकि साल 2002 में उन्होंने दूसरी बार मिल रहे इस ऑफर को ठुकरा दिया था.

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